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Bengaluru: सीएम सिद्धारमैया ने विप्रो प्रमुख से क्यों मांगी ट्रैफिक जाम समस्या को कम करने के लिए मदद? जानें

Wed, 24 Sep 2025 12:08 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विप्रो के संस्थापक को ट्रैफिक समस्या कम करने के लिए खास अपील की है। उन्होंने विप्रो के कैंपस में सीमित वाहनों की आवाजाही की इजाजत देने का आग्रह किया है, ताकि बंगलूरू के आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक जाम को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सके। 
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विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी से एक अहम गुजारिश की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि बंगलूरू आउटर रिंग रोड पर बढ़ते जाम को कम करने की पहल के तहत कंपनी अपने कैंपस में वाहनों की सीमित आवाजाही की अनुमति दे। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस कदम से ट्रैफिक का दबाव घटेगा और आईटी कॉरिडोर में सफर करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।

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आउटर रिंग रोड पर बढ़ती भीड़ गंभीर समस्या

सिद्धारमैया ने कंपनी के फाउंडर अजीम प्रेमजी को लिखे पत्र में आउटर रिंग रोड (ORR) पर बढ़ती भीड़भाड़, खासकर इब्लुर जंक्शन के पास, को गंभीर समस्या बताया।

इस सामाधान से रओआरआर पर 30 प्रतिशत 

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि अगर तय शर्तों और सुरक्षा प्रावधानों के तहत विप्रो अपने कैंपस से सीमित वाहनों की आवाजाही की अनुमति देता है, तो ट्रैफिक जाम में बड़ी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कदम से पीक ऑवर्स में ORR पर जाम लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

सिद्धारमैया ने लिखा कि इससे न केवल यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा बल्कि बंगलूरू को अधिक कुशल और रहने योग्य शहर बनाने की दिशा में भी मदद होगी। उन्होंने विप्रो से आग्रह किया है कि उनकी टीम जल्द से जल्द सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर इस पर ठोस योजना तैयार करे।

ट्रैफिक समस्या से जूझता बंगलूरू

बंगलूरू का आउटर रिंग रोड, जो कई बड़ी प्रौद्योगिकी कम्पनियों और स्टार्टअप्स का घर है, लंबे समय से यातायात की भीड़, खराब सड़क गुणवत्ता और समय पर रखरखाव की कमी से जूझ रहा है। हाल ही में लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप ब्लैकबक ने शहर के आउटर रिंग रोड क्षेत्र से अपना दफ्तर हटाने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि बिगड़ते सड़क हालात और बढ़ते आवागमन समय के कारण कर्मचारियों के लिए वहां काम करना मुश्किल हो गया है। कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ राजेश याबाजी ने कहा कि सड़कें गड्डों और धूल से भरी हैं, और उन्हें ठीक कराने की कोई मंशा नहीं है , अगले 5 वर्षों में इसमें कोई बदलाव नहीं दिखेगा।

उपमुख्यमंत्री की बैठक

इसके बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी (जीबीए) और पांच नगर निगमों से संबंधित मुद्दों पर एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। उन्होंने कहा था कि खराब नागरिक कार्यों के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि बंगलूरू में लोगों के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने में समय लगेगा और उन्होंने नागरिकों से सहयोग करने और नियमित रूप से करों का भुगतान करने का अनुरोध किया था।

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