सोने-चांदी की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती और ठंडे माहौल के बीच सोने की कीमत 40 हजार और चांदी 52 हजार रुपये के स्तर को पार कर चुकी है। वहीं बढ़ती कीमतों के बीच सोने का आयात अगस्त माह में 76 फीसदी तक घट गया है। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है क्या लोगों को सोने-चांदी में निवेश करना चाहिए या नहीं।
कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के रिसर्च हेड और उपाध्यक्ष डा. रवि सिंह के अनुसार कीमत बढ़ने के दौरान सोने-चांदी में निवेश करना फायदे का सौदा नहीं है। अगर आप आज की तारीख में इन बहुमूल्य धातुओं में निवेश करते हैं, तो हो सकता है कि भविष्य में उतना रिटर्न नहीं मिले। इसलिए कीमतों में कमी होने का इंतजार करना चाहिए।
रवि सिंह के अनुसार, फिलहाल वैश्विक बाजार में सोना 1500 डॉलर के पार चला गया है। सोने-चांदी को मुश्किल समय में निवेश का सबसे पसंदीदा माध्यम माना जाता है। यह शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट और अन्य निवेश के प्रचारित माध्यम में सबसे ऊपर रहता है। महंगाई को काबू रखने, पैसे को संभालना और बढ़िया रिटर्न के चलते निवेशक इसमें पैसा लगाना समझदारी का काम मानते हैं। ऐसे में लोग अपनी आय का 30 से लेकर के 40 फीसदी तक निवेश कर सकते है।
सोने के बढ़ते दामों ने आम लोगों को भी मुश्किल में डाल दिया है। जिन लोगों को अपने बच्चों की शादी या दूसरे मौके के लिए सोना खरीदना हो उन्हें तो तुरंत में फैसला लेने की जरूरत है। 2013 में ज्यादातर लोग तब सोना खरीदने बाजार पहुंचे थे जब उसकी कीमत 35 हजार रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गई थी। इसके ठीक बाद अंतरराष्ट्रीय वजहों से सोने के दाम लगातार घटते चले गए थे।
इस महीने की शुरुआत के तीसरे दिन ही सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला। दिल्ली सराफा बाजार में चांदी में 1038 रुपये का उछाल आया। सोना तीन सितंबर 2019 को को 595 रुपये की छलांग लगाकर 40,195 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया।
सोने का यह 29 अगस्त के बाद का उच्चतम स्तर है। 29 अगस्त को यह 40,220 रुपये प्रति दस ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था। हालांकि, उसके बाद लगातार तीन कारोबारी दिवस में गिरावट रही। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया नौ माह के निचले स्तर पर पहुंच गया।
जब भी निवेशकों को आर्थिक हालात ठीक नहीं लगते तब वह सोने के निवेश को प्राथमिकता देते हैं। सोने की डिमांड बढ़ने की वजह से कीमत में इजाफा होता है। इसके अलावा घरेलू बाजार में खरीदारी ज्यादा होती है, तब भी सोने के भाव में तेजी आती है। खासतौर पर त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी बढ़ जाती है। वहीं सरकार की नीतियों और फैसलों का भी सोने के भाव पर असर पड़ता है।
अगस्त 2018 से लेकर अब तक सोने की कीमतों में 8,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक की तेजी आ चुकी है। इसके कारणों में डॉलर के मुकाबले रुपए में आई कमजोरी के साथ-साथ देश में सोने के आयात पर बढ़ाया गया शुल्क भी शामिल है।
देश में सोने की कीमत में तेजी की एक बड़ी वजह ग्लोबल राजनीतिक संकट है। दुनियाभर में फैल रही आर्थिक मंदी और अनिश्चितता के कारण सोने की मांग तेजी से बढ़ी है।दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बरकरार है। हाल ही में अमेरिका की ओर से चीन की वस्तुओं पर आयात शुल्क लगा दिया गया है।
वहीं चीन पर अपनी करेंसी युआन के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। इन हालातों में चीन की ओर से कठोर जवाब के संकेत मिल रहे हैं। इन सभी हालातों ने भी निवेशकों में भय का माहौल बनाया है। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताओं ने भी निवेशकों को डराया है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ रेट का अनुमान 3.5 फीसदी से घटाकर 3.3 फीसदी कर दिया है।
पूरी दुनिया के सेंट्रल बैंकों ने 2019 की पहली छमाही में 374 टन सोना खरीदा, जो पिछले साल से 68 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान सोने की कीमत 18 फीसदी बढ़ी है। तुर्की, कजाकिस्तान, चीन और रूस के सेंट्रल बैंक सोने के सबसे बड़े खरीदार हैं, जबकि आरबीआई ने भी इस साल खरीद बढ़ाई है और वह भी टॉप 10 खरीदारों में शामिल हो गया है।
सबसे बुरा असर छोटे ज्वैलर्स पर पड़ा है। कई ज्वैलर्स के यहां बोहनी तक की आफत हो गयी है। पिछले एक माह में सोने के भाव में तीन हजार रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गयी है। आने वाले दिनों में और तेजी आने की संभावना है। गहनों की बिक्री 25 फीसदी कम हो गई है। अभी जो ग्राहक आ रहे हैं, वह लाइट वेट के गहने खरीद रहे हैं। जिन घरों में शादी है, वह भी एडवांस बुकिंग नहीं करा रहे हैं। ग्राहक भाव गिरने का इंतजार कर रहे हैं।