वैश्विक स्तर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कुल फर्मों का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। यह औसतन 70 फीसदी रोजगार पैदा करते हैं। एमएसएमई 35 से 45% तक जीडीपी में योगदान देते हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह योगदान और भी मजबूत है।
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एमएसएमई जीडीपी में देता है 30 प्रतिशत का योगदान
यूग्रो कैपिटल के मुख्य राजस्व अधिकारी समीर नंदा का मानना है कि भारत में एमएसएमई लगभग 30% जीडीपी में योगदान देते हैं और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं। एमएसएमई निर्यात भी 2020-21 में ₹3.95 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹12.39 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
हालांकि, एमएसएमई के लिए क्रेडिट गैप एक बड़ी चुनौती है। इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन के अनुसार, विकासशील देशों में करीब 6.5 करोड़ एमएसएमई को हर साल $5.2 ट्रिलियन की वित्तीय कमी का सामना करना पड़ता है। भारत में ही यह क्रेडिट गैप लगभग ₹28 लाख करोड़ है। इस अंतर को पाटने में गैर सरकारी वित्तीय संस्थाएं (एनबीएफसी) अहम भूमिका निभा रही हैं।
एमएसएमई के लिए एनबीएफसी बनीं मजबूत ताकत
वित्त वर्ष 2022-23 में एमएसएमई लेंडिंग पोर्टफोलियो में एनबीएफसी ने 3 गुना सालाना वृद्धि दर्ज की। जहां बैंकों ने एमएसएमई को 12.4% अधिक कर्ज दिया। वहीं एनबीएफसी की वृद्धि 42.4% रही। सितंबर 2024 में जारी एमएसएमई संपर्क रिपोर्ट के अनुसार, वर्किंग कैपिटल लोन का हिस्सा 2023 में 66% से बढ़कर 71% हो गया। माइक्रो एंटरप्राइजेज को ₹10 लाख से अधिक के लोन देने का अनुपात 2020 में 19% से बढ़कर 2023 में 40% हो गया।
एनबीएफसी आधारित एमएसएमई लेंडिंग पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2019 से अब तक 36.19% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से वृद्धि की है, वह भी कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों के दौरान।
क्यों असरदार है एनबीएफसी?
एनबीएफसी ने एमएसएमई को टेलर-मेड समाधान दिए हैं, जैसे कोलेटरल-फ्री लोन, सप्लाई चेन फाइनेंसिंग, माइक्रोफाइनेंस और लीज फाइनेंसिंग। वे पारंपरिक गिरवी के बजाय वैकल्पिक डेटा (जैसे जीएसटी रिटर्न, यूटिलिटी बिल और डिजिटल लेनदेन) के आधार पर क्रेडिट मूल्यांकन करती हैं। तेज डिजिटल प्रोसेस की वजह से एनबीएफसी लोन को जल्दी मंजूर करती हैं, जिससे एमएसएमई तुरंत कारोबारी अवसरों का लाभ उठा पाते हैं।
सरकार की योजनाओं से मिली मजबूती
नंदा के अनुसार सरकार ने महामारी के बाद सीजीटीएमएसई और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी कई योजनाओं को मजबूत किया है। एनबीएफसी ने टेक्नोलॉजी और इन पहलों का लाभ उठाकर एमएसएमई को सस्ता और जरूरी क्रेडिट मुहैया कराया है।
आज एनबीएफसी एमएसएमई वित्तपोषण इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुकी हैं। ये न सिर्फ वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास को भी गति दे रही हैं। आने वाले समय में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और नीतिगत सहयोग के चलते एनबीएफसी की भूमिका एमएसएमई को सशक्त बनाने में और मजबूत होगी।