फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Study: भारत वैश्विक मोर्चे पर सौर ऊर्जा और एआई में बना अहम साझेदार, जानिए क्या कहती है WEF की रिपोर्ट

Thu, 08 Jan 2026 08:58 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

WEF Study: भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद वैश्विक सहयोग स्थिर, लेकिन 'शांति और सुरक्षा' के मोर्चे पर भारी गिरावट। भारत सौर ऊर्जा और AI में अहम साझेदार बनकर उभरा। जानें ग्लोबल को-ऑपरेशन बैरोमीटर 2026 के मुख्य निष्कर्ष।
विज्ञापन
wef - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनिया भर में जारी भारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद वैश्विक सहयोग ने उम्मीद से बेहतर लचीलापन दिखाया है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक, सुरक्षा और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए यह सहयोग अभी भी पर्याप्त नहीं है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) ने गुरुवार को जारी अपनी 'ग्लोबल को-ऑपरेशन बैरोमीटर 2026' रिपोर्ट में यह बात कही है।

विज्ञापन


मैकिन्से एंड कंपनी के सहयोग से तैयार किए गए इस बैरोमीटर का यह तीसरा संस्करण है। इसमें पांच प्रमुख स्तंभों- व्यापार और पूंजी, नवाचार और तकनीक, जलवायु और प्राकृतिक पूंजी, स्वास्थ्य और कल्याण, तथा शांति और सुरक्षा- के आधार पर वैश्विक सहयोग का आकलन किया गया है।

शांति और सुरक्षा में सबसे बड़ी गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, जहां अन्य क्षेत्रों में स्थिरता देखी गई है, वहीं 'शांति और सुरक्षा' के स्तंभ में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस श्रेणी के सभी मेट्रिक्स कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर से नीचे चले गए हैं। संघर्षों में वृद्धि और सैन्य खर्च बढ़ने के कारण वैश्विक बहुपक्षीय समाधान तंत्र संकटों को कम करने में संघर्ष करते दिखे। रिपोर्ट बताती है कि 2024 के अंत तक दुनिया भर में जबरन विस्थापित लोगों की संख्या रिकॉर्ड 12.3 करोड़ (123 मिलियन) तक पहुंच गई थी।

दुनिया में बदल रहा सहयोग का तरीका

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में सहयोग का स्वरूप बदल रहा है। जहां बड़े बहुपक्षीय रास्तों के जरिए देशों के बीच सहयोग कमजोर हुआ है, वहीं क्षेत्रों के भीतर और बीच में छोटे, लेकिन नए समझौते हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक प्राथमिकताओं पर प्रगति तब सबसे तेज दिखती हैं, जब वे राष्ट्रीय हितों के साथ मेल खाती हैं- विशेष रूप से जलवायु और तकनीक के क्षेत्रों में।

डब्ल्यूईएफ के प्रमुख बोर्गे ब्रेंडे ने कहा, "दशकों की सबसे अस्थिर और अनिश्चित अवधि के बीच वैश्विक सहयोग ने लचीलापन दिखाया है। आज का सहयोग कल जैसा नहीं दिख सकता है, लेकिन अर्थव्यवस्थाओं को बुद्धिमानी से बढ़ाने और अनिश्चित दौर की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए लचीले और उद्देश्य-संचालित दृष्टिकोण आवश्यक हैं"।

सौर ऊर्जा और तकनीक में भारत ग्लोबल लीडर

रिपोर्ट में भारत की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। 'लो-कार्बन गुड्स' (कम कार्बन वाले सामान) का व्यापार वैश्विक सहयोग का एक बड़ा विकास इंजन बनकर उभरा है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं ने विनिर्माण को बढ़ाने और कीमतें कम करने में मदद की, इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को फायदा हुआ। डब्ल्यूईएफ के अनुसार, भारत ने 2025 में चीन के बाद दुनिया में सबसे अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। किफायती सोलर मॉड्यूल तक पहुंच ने भारत और ब्राजील जैसे देशों में इंस्टॉलेशन को तेज करने में अहम भूमिका निभाई।

विज्ञापन


इसके अलावा, तकनीक और संसाधनों के संवेदनशील प्रवाह में भी 'समान विचारधारा वाले साझेदार' सहयोग गहरा कर रहे हैं। रिपोर्ट में भारत, खाड़ी देशों, जापान और यूरोप के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहयोग का हवाला दिया गया है। साथ ही, अमेरिका और उसके सहयोगियों (यूरोप, खाड़ी और भारत) के बीच एआई डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में साझेदारी बढ़ रही है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें