प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रशिक्षित श्रमिकों की कोई कमी नहीं है। यहां विश्व स्तर के इंजीनियरों की फौज है, अनसंधान एवं विकास या आरएंडडी के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों की भारी भरकम संख्या है। साथ ही यहां मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या में जबरदस्त विस्तार हो रहा है, मतलब यहां खरीदारों की कोई कमी नहीं है। साथ ही लोगों की खरीद की क्षमता भी बढ रही है।
उन्होंने बताया कि एफडीआई में तेजी से प्रवाह बढा है। इसे बढावा देने के लिए सरकार ने अधिकतर क्षेत्र को एपफडीआई के लिए खोल दिया है। 90 फीसदी से भी ज्यादा क्षेत्र में आटोमेटिक रूट से एफडीआई को अनुमति है। तभी तो पिछले चार साल में यहां 263 अरब डॉलर का एफडीआई आया है।
प्रधानमंत्री का कहना है कि यहां करोबार ही नहीं, आम जनता भी स्मार्ट हो रहे हैं। डिजिटलीकरण की तरफ तेजी से कदम बढ रहे हैं। डिजिटल पेमेंट का प्रतिशत बढा है। डीबीटी के जरिये अब सब्सिडी का भुगतान हो रहा है। ईज आफ डूइंग बिजनेस के साथ ईज आफ लाइफ के के स्तर में भी सुधार हो रहा है।
लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है, रोजगार के अवसरों में बढोतरी हो रही है और ढांचागत संरचना भी बढिया बन रहा है। हाल के वर्षों में सरकार ने इस ओर कुछ ज्यादा ही ध्यान दिया है। औद्योगिक सुविधाएं बढायी जा रही है ताकि भारत ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब बन सके। यहां सडक तेजी से बन रही हैं, बंदरगाह, हवाई अउडा, रेल सब कुछ तेजी से बन रहा है।
निवेशकों को उन्होंने कहा कि इस समय आयुष्मान भारत योजना में 50 करोड लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। इसलिए स्वास्थ्य से जुडी ढांचागत संरचना तैयार करने में काफी अवसर है। यही नहीं, देश के 50 शहरों में मेट्रो रेल बनायी जा रही है। पांच करोड मकान बनाये जा रहे हैं। हर क्षेत्र में कारोबार का काफी अवसर है।
इस सम्मेलन का आयोजन गांधीनगर में 18 से 20 जनवरी तक किया जा रहा है। इसमें तीन देशों के प्रमुख, सात देशों के मंत्री, 30000 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें कई भारतीय और विदेशी कंपनियों के प्रमुख, सीईओ भी शामिल हो रहे हैं।
भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में टाटा समूह के प्रमुख एन चंद्रशेखरन, रिलायंस के अध्यक्ष मुकेश अंबानी, आदित्य बिरला समूह के अध्यक्ष कुमारमंगलम बिरला, अदानी समूह के अध्यक्ष गौतम अदानी, टोरंट समूह के अध्यक्ष सुधीर मेहता ने प्रधानमंत्री के साथ मंच शेयर किया। इसमें पडोसी देशों से बडी संख्या में प्रतिनिधि शामिल थे जबकि पाकिस्तान का प्रतिनिधि नहीं दिखा।