प्रसिद्ध कॉफी चेन सीसीडी (कैफे कॉफी डे) के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ की मौत के करीब एक साल बाद उनके द्वारा छोड़े गए पत्र और कॉफी डे के खातों की जांच में एंटरप्राइजेज की बैलेंस सीट में 2,693 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है। जांच रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि मैसूर अमाल्गमेटेड कॉफी एस्टेट्स लिमिटेड (MACEL) का 31 जुलाई 2019 तक कॉफी डे एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनियों पर 3,535 करोड़ रुपये बकाया है। बता दें कि MACEL एक निजी कॉफी ट्रेडिंग फर्म है, जो सिद्धार्थ और उनके पिता के स्वामित्व में थी।
बता दें कि 30 अगस्त, 2019 को, सीसीडी के बोर्ड ने सीबीआई के पूर्व उप महानिरीक्षक अशोक कुमार मल्होत्रा को सिद्धार्थ द्वारा पत्र में दिए गए बयानों की परिस्थितियों की जांच करने और सीसीडी और उसकी सहायक कंपनियों के खातों की पुस्तकों की जांच करने के लिए नियुक्त किया था। रिपोर्ट के अनुसार सिद्धार्थ ने संभवत: इस राशि का इस्तेमाल निजी इक्विटी निवेशकों को वापस करने के लिए, ऋण चुकाने के लिए या अन्य निजी निवेशों के लिए किया हो। लेकिन, यह जांच के दायरे से बाहर था और इसीलिए इस राशि का हिसाब नहीं दिया जा सका था।
सीसीडी ने आमदनी और खर्च की संभावनाओं का हिसाब लगाते हुए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 280 रेस्टोरेंट बंद किए हैं। इससे उसके रेस्टोरेंट घट कर 30 जून 2020 को 1,480 रह गए थे। कैफे कॉफी डे ब्रांड का स्वामित्व कॉफी डे ग्लोबल के पास है, जो कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड (सीडीईएल) की सहायक कंपनी है। कंपनी ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उसके कैफे की औसत दैनिक ब्रिकी भी अप्रैल-जून तिमाही के दौरान घटकर 15,445 रुपये रह गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 15,739 रुपये थी।