गिरावट की वजहें: प्रतिबंध, निवेश की कमी और जर्जर ढांचा
2013 से 2020 के बीच वेनेजुएला का तेल उत्पादन 75 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, गहरा आर्थिक संकट, निवेश और रखरखाव की भारी कमी ने तेल उद्योग को लगभग ठप कर दिया। सरकारी तेल कंपनी पीडीवीसीए के मुताबिक, देश की पाइपलाइनों को 50 साल से अपग्रेड नहीं किया गया है। उत्पादन को पुराने शिखर स्तर तक लाने के लिए करीब 58 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन
वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल कच्चे तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को भेजा जाता है। इसके बावजूद संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है, खासकर भारी क्रूड की जरूरत के चलते।
अमेरिका के नेतृत्व में बदलाव से क्या बदलेगा?
बता दें कि जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल जहाजों से कच्चा तेल जब्त करना शुरू किया था, उस दौरान अमेरिका में तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थीं। हालांकि यह तेजी टिक नहीं पाई और कीमतें फिर से गिरकर करीब 57 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका के नेतृत्व में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र का पुनर्गठन होता है, तो लंबी अवधि में यह एक बड़ा आपूर्तिकर्ता बन सकता है। इससे पश्चिमी तेल कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे और वैश्विक आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव रह सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय पहुंच तुरंत बहाल होने पर भी उत्पादन पूरी तरह लौटने में 5 से 10 साल लग सकते हैं।
भारी तेल है एक बड़ी चुनौती
वेनेजुएला का तेल भारी है, जिसे निकालने और रिफाइन करने के लिए उन्नत तकनीक चाहिए। अमेरिकी रिफाइनरियां इसी तरह के तेल के लिए डिजाइन की गई हैं और वेनेजुएला का तेल उनके लिए ज्यादा उपयुक्त है। लेकिन जब तक प्रतिबंध हटते नहीं और भारी निवेश नहीं होता, तब तक यह क्षमता कागजों तक ही सीमित रहेगी।
बाजार पर तत्काल असर क्यों नहीं?
तेल बाजार पहले से ही ओवरसप्लाई और कमजोर मांग की आशंकाओं से जूझ रहा है। ओपेक उत्पादन बढ़ा रहा है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई के दबाव में है। ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा।