वैश्विक अनिश्चितताओं और आंतरिक नीतिगत बदलावों के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने जबरदस्त लचीलापन दिखाते हुए उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। वाणिज्य विभाग द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर की तिमाही में अमेरिका की सकल घरेलू उत्पाद विकास दर 4.4 प्रतिशत रही। यह पिछले दो वर्षों में दर्ज की गई सबसे तेज वृद्धि दर है। हालांकि, इन शानदार आंकड़ों के पीछे रोजगार बाजार की सुस्ती और आय में असमानता की गहरी चिंताएं भी छिपी हुई हैं।
उपभोक्ता खर्च और निर्यात से मिली मजबूती
वाणिज्य विभाग ने अपने पहले के अनुमान (4.3 प्रतिशत) को संशोधित करते हुए बताया कि तीसरी तिमाही में विकास दर 4.4 प्रतिशत रही। इस तेजी का मुख्य इंजन अमेरिकी उपभोक्ता रहे। अमेरिकी जीडीपी में 70 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले 'उपभोक्ता खर्च' में 3.5 प्रतिशत की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा, निर्यात में उछाल और आयात में गिरावट ने भी विकास दर को 3.8 प्रतिशत (अप्रैल-जून तिमाही) से ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई,। गौरतलब है कि 2023 की तीसरी तिमाही के बाद से अर्थव्यवस्था ने इतनी तेज गति से विकास नहीं किया था।
ट्रंप की नीतियों के बीच अर्थव्यवस्था का लचीलापन
यह आर्थिक वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रामक व्यापार नीतियों के कारण बाजार में अनिश्चितता का माहौल था। विशेष रूप से दुनिया के लगभग हर देश से आयात पर लगाए गए 'डबल-डिजिट टैक्स' के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पटरी पर बनी हुई है।
आंकड़े अच्छे पर चुनौतियां क्या?
जीडीपी के मजबूत आंकड़ों के बावजूद, जमीनी स्तर पर अमेरिकी नागरिकों में अर्थव्यवस्था को लेकर असंतोष है। इस विरोधाभास को विश्लेषक "K-Shaped Economy" के रूप में देख रहे हैं। इस स्थिति में:
• अमीर वर्ग: शेयर बाजार में तेजी और बढ़ते निवेश के कारण अमीरों की आय बढ़ रही है।
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निम्न आय वर्ग: दूसरी तरफ, कम आय वाले परिवार रुकी हुई तनख्वाह और जीवन-यापन की उच्च लागत से जूझ रहे हैं।
यही कारण है कि मजबूत ग्रोथ नंबरों के बावजूद, कई अमेरिकी महंगाई और अर्थव्यवस्था के हाल से खुश नहीं हैं।
रोजगार बाजार में सुस्ती: 'नो-हायर, नो-फायर' की स्थिति
अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर और जॉब मार्केट के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। मार्च के बाद से नियोक्ताओं ने प्रति माह औसतन केवल 28,000 नौकरियां ही जोड़ी हैं। यह आंकड़ा कोविड-19 लॉकडाउन के बाद 2021-2023 के दौरान देखे गए 4,00,000 नौकरियों प्रति माह के बूम की तुलना में बेहद सुस्त है।
हालांकि, बेरोजगारी दर अब भी 4.4 प्रतिशत के निचले स्तर पर है। यह एक ऐसे श्रम बाजार का संकेत देता है जहां कंपनियां नए कर्मचारियों को भर्ती करने में हिचकिचा रही हैं, लेकिन साथ ही वे मौजूदा कर्मचारियों को निकालने के लिए भी तैयार नहीं हैं। इसे "नो-हायर, नो-फायर" लेबर मार्केट कहा जा रहा है। कुल मिलाकर, अमेरिकी अर्थव्यवस्था मैक्रो-लेवल पर मजबूत दिख रही है, जिसका श्रेय उपभोक्ताओं के खर्च को जाता है। रोजगार सृजन में आई भारी कमी यह संकेत देती है कि विकास का फायदा समाज के सभी वर्गों तक एक समान नहीं पहुंच रहा।