भारत से अमेरिका को होने वाले चुनिंदा निर्यात पर बुधवार से 50 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है। इसमें से 25 फीसदी टैरिफ सात अगस्त से ही लागू हो गया था, जबकि रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाया गया 25% जुर्माना टैरिफ आज से लागू हो गया है। इसका मसौदा नोटिस ट्रंप प्रशासन ने जारी कर दिया है। आदेश पूरी तरह भारत केंद्रित है। इसमें चीन का कोई जिक्र नहीं है, जो रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
ये दायरे से बाहर:
पड़ोसियों से ही मिलेगी चुनौती
नए शुल्क के बाद, भारत के प्रतिस्पर्द्धियों की स्थिति अमेरिकी बाजार में बेहतर हो जाएगी। इनमें म्यांमार (40 प्रतिशत टैरिफ), थाईलैंड व कंबोडिया (36), बांग्लादेश (35), इंडोनेशिया (32), चीन और श्रीलंका (30), मलयेशिया (25), फिलीपीन और वियतनाम (20) शामिल हैं। इन देशों के उत्पाद कम टैरिफ लगने के कारण भारतीय उत्पादों की तुलना में अमेरिकी बाजार में कम कीमतों में उपलब्ध होंगे।
नौकरियां जाने का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ के चलते भारत में रत्न-आभूषण, वस्त्र-परिधान, मशीनरी, चमड़ा और रसायन से जुड़े उद्योगों पर भारी असर पड़ सकता है। उत्पादन कम होने के चलते इन उद्योगों में नौकरियों पर भी संकट आ सकता है।
भारत के पास विकल्प
खुद रूस से ट्रेड डील करता रहा अमेरिका
भारत पर टैरिफ थोप रहे अमेरिका का दोहरा रवैया सामने आया है। एक तरफ वह रूस से कारोबार पर भारत पर टैरिफ लगा रहा है, वहीं खुद रूस से कारोबार के लिए वार्ताएं कर रहा है। वह यूक्रेन युद्ध के बाद से बंद अमेरिकी कंपनी एक्सोन मोबिल को रूस में फिर तेल उत्पादन की अनुमति चाहता है।