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US Tariffs: भारतीय बाजार पर अमेरिका के जवाबी टैरिफ का क्या असर, कौन से छह क्षेत्र होंगे सबसे अधिक प्रभावित?

Wed, 02 Apr 2025 01:43 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

US Tariffs Impact on India: अगर अमेरिका भारत पर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान करता है तो भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों और शेयर बाजार में उथल-पुथल दिख सकता है। यदि ट्रम्प ने अनुमान से कम टैरिफ की घोषणा की तो फार्मा और आईटी सहित निर्यात से जुड़े क्षेत्रों के शेयर मजबूत हो सकते हैं। दूसरी ओर, अधिक गंभीर टैरिफ लगाने से बाजार में नरमी भी आ सकती है। अमेरिकी टैरिफ का भारत के किन पांच क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा, आइए जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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आज दो अप्रैल है और इसी के साथ अमेरिका की ओर से घोषित पारस्पारिक टैरिफ का खतरा भारतीय बाजार पर लटक रहा है। अगर अमेरिका भारत पर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान करता है तो भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों और शेयर बाजार में उथल-पुथल दिख सकता है। यदि ट्रम्प ने अनुमान से कम टैरिफ की घोषणा की, तो फार्मा और आईटी सहित निर्यात से जुड़े क्षेत्रों से जुड़े शेयर मजबूत हो सकते हैं। इससे सेंसेक्स और निफ्टी में आने वाले समय में हम उछाल देख सकते हैं। दूसरी ओर, अधिक गंभीर टैरिफ लगाने से बाजार में नरमी भी आ सकती है। जानकारों का मानना है कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी वस्तुओं पर भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अमेरिका के टैरिफ से अधिक शुल्क लगाए हैं। इसका साफ मतलब है कि अमेरिकी टैरिफ के निशाने पर प्रमुख रूप से भारत भी है। अमेरिका के जवाबी टैरिफ से देश का फार्मा, ऑटोमोबाइल, कृषि और वस्त्र उद्योग पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है। इससे अरबों का व्यापार बाधित हो सकता है।

भारत और अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान निकाले की कोशिश में

नई दिल्ली टैरिफ के मसले पर अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश में है। लेकिन विश्लेषकों को आशंका है कि अमेरिका और अन्य देश यदि जवाबी कार्रवाई का मन बनाने लगे तो वर्तमान हालात व्यापार युद्ध में बदल सकता है। केयरएज रेटिंग्स के कार्यकारी निदेशक और मुख्य रेटिंग अधिकारी सचिन गुप्ता ने कहा, "अमेरिकी टैरिफ लगाने से निर्यात-संचालित क्षेत्रों की गति बाधित हो सकती है। इसके साथ ही इससे प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं के बीच कीमतों के मोर्चे पर एक नई प्रतिस्पर्धा भी शुरू हो सकती है। इसका एक दुष्परिणाम यह भी होगा कि स्पष्ट संकेत न मिलने तक निजी क्षेत्र अपने पूंजीगत व्यय से परहेज कर सकता है।"

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आइए जानते हैं अमेरिका की जवाबी टैरिफ से भारत के किन पांच क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है?
 

1. कृषि क्षेत्र

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के विश्लेषण के अनुसार, कृषि क्षेत्र में अमेरिका के जवाबी टैरिफ का सबसे अधिक प्रभाव मछली, मांस और प्रसंस्कृत समुद्री भोजन के निर्यात पर पड़ेगा। 2024 में इनका निर्यात 2.58 अरब डॉलर था। अब हालिया घटनाक्रम के बीच इस क्षेत्र पर 27.83 प्रतिशत से अधिक टैरिफ का भार बढ़ सकता है। ऐसे में अमेरिका को झींगे का निर्यात टैरिफ लागू होने के बाद प्रभावित हो सकता है। कोलकाता स्थित समुद्री खाद्य निर्यातक और मेगा मोडा के प्रबंध निदेशक योगेश गुप्ता ने कहा, "अमेरिका में हमारे निर्यात पर पहले से ही डंपिंग रोधी और प्रतिपूरक शुल्क लागू हैं। शुल्कों में अतिरिक्त वृद्धि से हम अप्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। भारत के कुल झींगा निर्यात में से हम 40 प्रतिशत अमेरिका को निर्यात करते हैं।" उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका अपने प्रतिस्पर्धी देशों इक्वाडोर और इंडोनेशिया पर भी इसी प्रकार का टैरिफ लगाए तो भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिल सकती है।

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भारत के प्रसंस्कृत खाद्य, चीनी और कोको निर्यात पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि इन उत्पादों का टैरिफ गैप 24.99 प्रतिशत है। पिछले साल इनका निर्यात 1.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसी प्रकार अनाज, सब्जियां, फल और मसालों (1.91 बिलियन अमेरिकी डॉलर शिपमेंट) के बीच टैरिफ अंतर 5.72 प्रतिशत है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि 181.49 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पादों के निर्यात पर 38.23 प्रतिशत के अंतर का गंभीर असर डाल सकता है। इससे घी, मक्खन और दूध पाउडर की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी घट सकती है।

अन्य उत्पाद जो प्रभावित हो सकते हैं, उनमें खाद्य तेल (199.75 मिलियन अमेरिकी डॉलर निर्यात और 10.67 प्रतिशत शुल्क अंतर); शराब, वाइन और स्पिरिट (19.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर निर्यात और 122.10 प्रतिशत शुल्क अंतर); जीवित पशु और पशु उत्पाद (10.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर निर्यात और 27.75 प्रतिशत अंतर) शामिल हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि तम्बाकू और सिगरेट, जिनका निर्यात 2024 में 94.62 मिलियन अमरीकी डॉलर का है, टैरिफ से अप्रभावित रह सकते हैं, क्योंकि अमेरिका पहले से ही इन उत्पादों पर 201.15 प्रतिशत टैरिफ लगाता है।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स

भारत ने वित्त वर्ष 24 में अमेरिका को कुल 11.1 बिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात किया। यह भारत से अमेरिका को किए गए कुल निर्यात का 14% था। वहीं भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में अमेरिकी हिस्सेदारी करीब 32% है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के मामले में भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ का अंतर करीब 9% है। ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत पर अतिरिक्त 9% का टैरिफ लगाता है तो इसका भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर व्यापक और बुरा असर पड़ सकता है। भारत से अमेरिका जिन इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात किया जाता है, उसमें एक बड़ी हिस्सेदारी असेंबल किए गए मोबाइल फोन हैं, जैसे आईफोन। यदि अमेरिका की ओर से जवाबी टैरिफ लागू हो होती है तो  एपल और भारत में इसे बनाने वाली कंपनियों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

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3. रत्न और आभूषण

रत्न और आभूषण क्षेत्र भी अमेरिकी टैरिफ के एलान के बाद प्रभावित हो सकता है। रत्न और आभूषण के निर्यात मामले में भारत एक अग्रणी देश है, जो फिलहाल टैरिफ के खतरों के कारण जोखिम में है। भारत के कुल 33 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 30% ($9.9 अरब डॉलर) है। इसमें कटे और पॉलिश किए गए हीरे, जड़े हुए सोने के आभूषण और प्रयोगशाला में बनाए गए हीरे शामिल हैं। एमके ग्लोबल के अनुसार भारत पर भारी टैरिफ से इस क्षेत्र के निर्यात को भारी नुकसान होगा, हालांकि भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी कारोबारी कम टैरिफ/एफटीए वाले देशों की ओर रुख कर सकते हैं। यदि भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाया जाता है तो भारतीय निर्माता भी सिंगापुर, यूएई या ओमान में अपना माल खपाने की जुगत कर सकते हैं। लेकिन, रोजगार के लिए अहम इस क्षेत्र में अगर निर्यात में बड़ी गिरावट आती है तो इस क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों को बड़े पैमाने पर अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है।

4. जेनरिक दवा

भारत अमेरिका के जेनेरिक दवा आयात का 47% हिस्से की आपूर्ति करता है। हमारी दवाएं अमेरिका की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भागीदार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत की जेनेरिक दवाएं कम लागत के कारण अमेरिका में खूब बिकती है। अमेरिकी विनिर्माण की आर्थिक अव्यवहारिकता और एक सफल द्विपक्षीय व्यापार समझौते तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए जेनेरिक दवाओं पर किसी जवाबी टैरिफ का खतरा कम है। लेकिन, अगर ऐसा होता है तो देश के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। नोमुरा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 2 अप्रैल को, अमेरिका भारत पर पारस्परिक टैरिफ लगा सकता है लेकिन फार्मास्यूटिकल टैरिफ पर कोई घोषणा होने की उम्मीद कम है। नोमुरा के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए 10% से कम का टैरिफ भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों पर सकारात्मक असर डाल सकता है। लेकिन, 10% से अधिक का टैरिफ संभावित फार्मा शेयरों को नुकसान पहुंचा जा सकता है। अधिकांश फार्मा कंपनियों का मानना है कि जवाबी टैरिफ अमेरिकी खरीदारों पर ही प्रतिकूल असर डाल सकती है।

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5. ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट

अमेरिका भारत के वाहन निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य नहीं है। इसलिए जवाबी टैरिफ से भारत के ऑटो उद्योग पर असर सीमित रह सकता है। हालांकि, ऐसे किसी टैरिफ से ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वित्त वर्ष 24 में भारत का अमेरिका में ऑटो कंपोनेंट निर्यात कुल निर्यात का 27% था। अमेरिका में निर्यात करने वाली प्रमुख कंपनियों जैसे सोना कॉमस्टार (उत्तरी अमेरिका से 43% राजस्व) और संवर्धन मदरसन (अमेरिका से 18% राजस्व) पर ट्रंप के जवाबी टैरिफ का असर देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका में विनिर्माण आधार न होने के कारण जेएलआर के वाहनों पर भी टैरिफ लगेगा, कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है। इंजन, ट्रांसमिशन और पावरट्रेन जैसे प्रमुख घटकों पर टैरिफ आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं। हालांकि, अधिकांश भारतीय निर्माता अलग-अलग देशों में निर्यात करते हैं, इसलिए ट्रंप के जवाबी टैरिफ का उनपर सीमित असर रह सकता है।,

6. कपड़ा और परिधान

वित्त वर्ष 24 में अमेरिका को कुल 9.6 अरब डॉलर के कपड़ों और वस्त्र का निर्यात किया गया। यह भारत के कुल निर्यात का 28% है। अमेरिका के जवाबी टैरिफ से बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारत प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अधिक टैरिफ के कारण भारतीय उत्पाद अधिक महंगे हुए तो इसका लाभ इन देशों को मिल सकता है। एमके के विश्लेषकों के अनुसार यदि व्यापक क्षेत्रीय स्तर पर पारस्परिक टैरिफ लगाए जाते हैं, तो भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात सबसे बुरी तरह प्रभावित होगा।" ऐसे में इस क्षेत्र को अमेरिकी प्रशासन के अंतिम निर्णय का बेसब्री का इंतजार है।

बाजार को ट्रंप के अंतिम फैसले का इंतजार

बाजार को ट्रंप प्रशासन के अंतिम फैसले का इंतजार है। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) का प्रवाह ट्रंप की घोषणाओं पर टिका हुआ है। हालांकि, बाजार के प्रतिभागी अस्थिरता के लिए तैयार हैं। अनिश्चितता के बावजूद, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत की मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट और दोनों देशों के बीच हो रही व्यापार वार्ता टैरिफ दबावों को कम करने में मदद कर सकती है। व्यापार समझौते के अमल में आने और कमजोर होते रुपये से कुछ राहत मिल सकती है। भारतीय निर्यात का विविध आधार यह सुनिश्चित करता है कि सभी उद्योग समान रूप से प्रभावित नहीं होंगे।

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