अमेरिकी शॉर्ट सेलर वाइसराय रिसर्च ने बुधवार को अरबपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली ब्रिटिश कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को एक "परजीवी" करार दिया और कहा कि फर्म अपनी भारतीय इकाई को "व्यवस्थित रूप से खत्म कर रही है"। हालांकि, इस आरोप को समूह ने "चुनिंदा गलत सूचना वाला और निराधार" बताया, जिसका उद्देश्य कंपनी को बदनाम करना है।
अमेरिकी कंपनी ने भारतीय खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड की ब्रिटेन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज के ऋण के खिलाफ शॉर्ट पोजीशन लेते हुए आरोप लगाया कि यह समूह "अस्थायी ऋण, लूटी गई संपत्ति और लेखांकन की कल्पना की नींव पर बना एक ताश का घर है।"
वेदांता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट "चुनिंदा गलत सूचनाओं और निराधार आरोपों का दुर्भावनापूर्ण मिश्रण" है और इसके लेखकों ने समूह से संपर्क किए बिना इसे जारी किया है।
वायसराय ने 85 पृष्ठ की रिपोर्ट में कहा, "वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (वीआरएल) एक 'परजीवी' होल्डिंग कंपनी है, जिसका अपना कोई महत्वपूर्ण संचालन नहीं है, यह पूरी तरह से अपने मरणासन्न 'मेजबान': वेदांता लिमिटेड (वीईडीएल) से निकाली गई नकदी पर टिकी हुई है।"
वीईडीएल ने पिछले चार वित्तीय वर्षों में 75,800 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है, जबकि इसकी इकाई हिंदुस्तान जिंक ने इसी अवधि में 57,300 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वीईडीएल में लाभांश भुगतान का 56.38 प्रतिशत वेदांता रिसोर्सेज को उसकी शेयरधारिता के अनुरूप मिला, जबकि हिंदुस्तान जिंक को 61.62 प्रतिशत लाभांश मिला।
वायसराय ने कहा कि वीईडीएल ने पिछले 3 वर्षों में लाभांश के मुकाबले 5.6 बिलियन अमरीकी डालर की मुक्त नकदी प्रवाह की कमी अर्जित की है, जबकि वित्त वर्ष 22 से इसका शुद्ध ऋण 6.7 बिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 200 प्रतिशत) बढ़ गया है। इसमें कहा गया है, "वीईडीएल का नकदी भंडार समाप्त हो गया है तथा धन उधार लेने और कार्यशील पूंजी मदों को 'परिसमाप्त' करने की उसकी क्षमता समाप्त हो गई है।"