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Trade: अमेरिकी उपविदेश सचिव बोले- भारत-US व्यापार समझौता लगभग तैयार, ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में करेंगे मदद

Fri, 06 Mar 2026 04:04 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर देने से वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो गया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
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क्रिस्टोफर लैंडाउ, अमेरिकी उपविदेश सचिव - फोटो : ANI
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विस्तार
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नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान अमेरिका के उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है और इसमें 'लगभग असीमित संभावनाएं' हैं।
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'पश्चिम एशिया में युद्ध से प्रभावित हुई सप्लाई'
क्रिस्टोफर लैंडाउ ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करेगा ताकि उसकी कम समय और लंबे समय की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऊर्जा संसाधनों से भरपूर देश है और भारत के लिए एक बड़ा वैकल्पिक स्रोत बन सकता है।
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'भारत का भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है अमेरिका'
क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत को सलाह दी कि वह ऊर्जा के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे और अमेरिका इस दिशा में भारत का भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भविष्य में और मजबूत हो सकता है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीदता रहेगा ताकि सप्लाई स्थिर बनी रहे।
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उपविदेश सचिव ने बताया 'अमेरिका फर्स्ट' का मतलब
क्रिस्टोफर लैंडाउ ने यह भी कहा कि इस सदी में भारत के तेजी से उभरने की संभावना है और अमेरिका चाहता है कि दोनों देश मिलकर काम करें। उनके मुताबिक ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका दूसरे देशों के हितों की अनदेखी करेगा, बल्कि वह ऐसे सहयोग चाहता है जिससे दोनों देशों को फायदा हो। रायसीना डायलॉग के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी क्रिस्टोफर लैंडाउ से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
 
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