राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) ने अपने ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। ट्रंप ने कटौती करने को कहा था, लेकिन केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को कम करने से इनकार कर दिया। जानिए यूएस फेड का यह फैसला कितना महत्वपूर्ण है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। यूएस फेड के प्रमुख जेरोम पावेल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कटौती की मांग नहीं मानी और इस साल लगातार पांचवीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। अमेरिका के केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व ने ट्रंप की मांग को किया नजरअंदाज करते हुए ब्याज दरों को लगभग 4.3 फीसदी पर बरकरार रखा है।
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अमेरिका के केंद्रीय बैंक और राष्ट्रपति के बीच तल्खी बढ़ने की आशंका
माना जा रहा है कि फेड के इस फैसले से व्हाइट हाउस और अमेरिका के केंद्रीय बैंक के बीच टकराव और बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप लगातार फेड पर दबाव बना रहे हैं कि वह ब्याज दरों में कटौती करे।
ट्रंप की टैरिफ नीतियों के असर का मूल्यांकन कर रहे अधिकारी
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के असर का मूल्यांकन किए बिना दरों में बदलाव कर देना जल्दबाजी होगी। केंद्रीय बैंक के मुताबिक टैरिफ नीतियों के एलान के बाद अमेरिका में अब तक उपकरण, फर्नीचर और खिलौनों जैसी कुछ वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं। इससे मुद्रास्फीति में भी थोड़ी वृद्धि हुई है, हालांकि यह उम्मीद से कम है।
फेडरल रिजर्व के प्रमुख ने कटौती न करने का फैसला क्यों लिया?
गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के आठ महीनों के दौरान कई बार फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती की मांग कर चुके हैं। लगातार की गई मांगों के बावजूद यूएस फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल और अन्य अधिकारियों ने इन मांगों को नजरअंदाज करते हुए फिलहाल दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। पॉवेल ने कहा कि अगर ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) नहीं होते, तो फेड अब तक दरों में कटौती कर चुका होता।
तीन दशकों में पहली बार सात गवर्नरों में से दो ने असहमति जताई
हालांकि, कटौती न करने के निर्णय को लेकर फेड के भीतर मतभेद सामने आने की भी खबर है। गवर्नर क्रिस्टोफर वालर और मिशेल बौमन ने ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में वोट किए, जबकि नौ अन्य अधिकारियों ने दरें यथावत रखने का समर्थन किया। खबर के मुताबिक तीन दशकों में पहली बार हुआ है जब फेड रिजर्व के सात गवर्नरों में से दो ने असहमति जताई है। एक अन्य गवर्नर एड्रियाना कुगलर अनुपस्थित रहीं और उन्होंने वोट नहीं किया।