मेथी और धनिया के अपने 1000 पैक बेचने के लिए बरकाले ने 35 किलोमीटर की यात्रा की थी। इन सब्ज़ियों को उगाने में उन्हें लगभग ₹20,000 का खर्च आया था है। ट्रांसपार्टेशन पर भी उन्होंने पांच हजार रुपये खर्च किए थे। फिर भी नीलामी के दौरान उन्हें पूरी उपज के सिर्फ एक हजार रुपये ही मिल रहे थे।
महाराष्ट्र के एक असंतुष्ट किसान ने अपने खेत की सारी धनिया और मेथी बाजार पहुंचे लोगों को मुफ्त में दे दी। किसान ने यह फैसला अपने उत्पादों की बाजार में कम कीमतों से निराश होकर लिया। बताया जा रहा है कि वह अपने उत्पादों की सही कीमत नहीं मिलने से बहुत परेशान था।
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नासिक के एक किसान संतोष बरकाले अपने खेत की उपज बेचने के लिए आए थे, लेकिन नीलामी के दौरना कीमतें बेहद कम मिल रही थीं। उत्पादों को बेचकर मिलने वाली राशि इन सब्जियों को उगाने में उनकी ओर से निवेश की गई राशि से 20 गुना कम थीं।
मेथी और धनिया के अपने 1000 पैक बेचने के लिए बरकाले ने 35 किलोमीटर की यात्रा की थी। इन सब्ज़ियों को उगाने में उन्हें लगभग ₹20,000 का खर्च आया था है। ट्रांसपार्टेशन पर भी उन्होंने पांच हजार रुपये खर्च किए थे। फिर भी नीलामी के दौरान उपज का प्रत्येक बंडल महज एक रुपये में बेचा जा रहा था। इसलिए गुस्से में आकर संतोष ने पूरी फसल वाहन चालकों और बाजार में घूम रहे लोगों को मुफ्त में देनी शुरू कर दी।
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बरकाले ने कहा, "मुझे अपनी पूरी उपज के लिए 1000 रुपये मिल रहे थे और मैंने सब्जियों के इस बैच पर कुल 25,000 रुपये का निवेश किया है। इनकी खेती में 20,000 रुपये और डिलीवरी में 5,000 रुपये लगे हैं।
बरकाले अपने निवेश और श्रम की एवज में बेहद कम रिटर्न मिलने से असंतुष्ट थे, इसलिए उन्होंने अपने उत्पादों को मुफ्त में देने का निर्णय लिया। वे बोले, "कीमतें इतनी कम हैं कि इसे मुफ्त में वितरित करना बेहतर है; कम से कम मुझे उन लोगों का आशीर्वाद मिलेगा जिन्हें ये ताजी सब्जियां मिलेंगी।"
उसकी दयनीय परिस्थितियों के बारे में जानने के बाद, कुछ लोग जिन्होंने इन पैकों को मुफ्त में प्राप्त किया, उनके साथ बात की और उन्हें खुश करने की कोशिश की।