भारत के बंदरगाह अब सिर्फ कार्गो आवाजाही के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि तेजी से एकीकृत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब में बदल रहे हैं। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 से अब तक भारत के बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता दोगुनी होकर 1,400 एमटीपीए से बढ़कर 2,771 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। सरकार ने 2030 तक इसे 3,500 एमटीपीए और 2047 तक 10,000 एमटीपीए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915 मिलियन टन से अधिक कार्गो संभाला, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
विजय कुमार ने कहा कि भारत जहाज निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। देश में राष्ट्रीय कंटेनर लाइन बनाई जा रही है, ऊर्जा बेड़े का विस्तार हो रहा है और गीफ्ट सीटी में जहाज वित्तपोषण योजना लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि अगले 15 वर्षों में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये की लागत से 437 जहाजों की मांग को पूरा करने की योजना है। इसमें तेल और गैस कंपनियों, भारतीय जहाजरानी निगम, ग्रीन टग्स और ड्रेजर्स की जरूरतें शामिल हैं। 34 जहाजों के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं।