बांग्लादेश: प्रतिशत के मामले में सबसे बड़ी कटौती बांग्लादेश की सहायता राशि में की गई है, जिसे आधा (50%) कर दिया गया है।
मालदीव और म्यांमार: इन दोनों देशों के बजट में ₹50-50 करोड़ की कमी की गई है।
चाबहार बंदरगाह के लिए राशि आवंटन गायब
बीते दिनों में कई हलकों में यह भी चर्चा हुई कि भारत आने वाले समय में अमेरिका के दबाव में चाबहार बंदरगाह योजना से बाहर भी हो सकता है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले ही धमकी दी थी कि ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच धमकी दी थी कि उससे व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी के अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया जाएगा।
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भारत पर पहले ही अमेरिका की तरफ से कुल 50 फीसद टैरिफ लगाया जा चुका है। इसमें 25 फीसदी आयात शुल्क व्यापार के मसले पर, जबकि अतिरिक्त 25 फीसदी रूस से तेल खरीद को लेकर लागू है। ऐसे में जब ट्रंप प्रशासन की तरफ से ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ का एलान किया गया तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस तक ने कहा कि भारत ने ट्रंप के दबाव में ईरान के चाबहार बंदरगाह पर नियंत्रण छोड़ दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने चाबहार पर जनता के करीब 1100 करोड़ रुपये लगाए थे, जो कि अब बर्बाद हो चुके हैं।
तब भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह चाबहार बंदरगाह को लेकर अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रहा है। हालांकि, अब ट्रंप की धमकियों का असर चाबहार परियोजना पर पड़ता दिख रहा है। बजट में इस बंदरगाह परियोजना के लिए जहां 2025-26 के बजट में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, वहीं 2026-27 के आवंटन वाला हिस्सा खाली छोड़ दिया गया है।
आपदा प्रबंधन के लिए भारत ने पिछली बार के मुकाबले बढ़ाई राशि
भारत ने विदेश में आपदा प्रबंधन के लिए सहायता के तौर पर 2025-26 के 64 करोड़ के मुकाबले 2026-27 में 80 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। भारत ने बीते साल इस राशि के जरिए श्रीलंका की दित्वाह चक्रवात से निपटने में मदद की। इसके अलावा म्यांमार और अफगानिस्तान की भूकंप के बाद हुई तबाही से निपटने में भी मदद की गई। सरकार ने इस राशि के जरिए कुछ देशों को राहत सामग्री भी पहुंचाई है।