केंद्र सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के मकसद से स्टार्टअप इंडिया-स्टैंडअप इंडिया जैसे कार्यक्रम की शुरुआत की थी। हालांकि सरकार के संरक्षण देने के बावजूद इन कंपनियों पर भी अन्य छोटी बड़ी कंपनियों की तरह टैक्स लग रहा है। ऐसे में कई कंपनियां शुरू होने से पहले ही बंद हो गईं।
देश की सबसे बड़ी पुरानी कार और दोपहिया वाहनों की खरीद फरोख्त करने वाले पोर्टल ड्रूम के संस्थापक व सीईओ संदीप अग्रवाल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले एक दशक में लंबा सफर तय कर चुका है, जो अमेरिका व चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे मजबूत इकोसिस्टम है। 2010 में हमारे यहां केवल 2 यूनीकॉर्न थे और अब उसकी तुलना में इस समय 25 के करीब यूनीकॉर्न है और संख्या के लिहाज से यूनीकॉर्न की सूची में तीसरे स्थान पर हैं।
भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का सपना देखा जा रहा है और स्टार्टअप इकोसिस्टम इसे हासिल करने में इनोवेशन, रोजगार के नए अवसरों और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देकर महत्वपूर्ण मदद कर सकता है। हालांकि, इसे वास्तविकता बनाने के लिए हमारी अपेक्षा है कि सरकार इस बजट में सक्रिय भागीदारी दिखाएगी। अग्रवाल ने यह पांच मांगे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से रखी हैं.....
एनालिटिक्स विद्या के संस्थापक व सीईओ कुणाल जैन ने बातचीत में कहा कि सरकार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग पर अपना फोकस करना चाहिए। बजट में उम्मीद है कि सरकार इस सेक्टर के लिए कुछ बड़े एलान कर सकती है। कई सारे स्टार्टअप्स एआई का इस्तेमाल लोन देने के लिए कर रहे है। ऐसे में उन लोगों को भी लोन मिल रहा है, जिनको पहले बैंक से लोन नहीं मिलता है। इससे भारत की फिनटेक और बैंकिंग इंडस्ट्री पर लंबे समय में काफी असर पड़ेगा