भारत को 2024-25 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सरकार को आगामी बजट में रियल एस्टेट क्षेत्र की मुश्किलें दूर करनी होंगी। नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) का कहना है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए मोदी सरकार को रियल एस्टेट क्षेत्र में नकदी संकट को दूर करना चाहिए। साथ ही समग्र रूप से इस क्षेत्र की समस्याओं के समाधान पर जोर देना होगा।
नरेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र भारी नकदी संकट से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार को फंसी आवासीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट कंपनियों के कर्ज का पुनर्गठन करना चाहिए या ऐसे कर्ज के मामले में उन्हें बैंकों से एकबारगी राहत दिलानी चाहिए। इससे कर्ज लेने वाली कंपनी का खाता ‘मानक खाता’ बना रहेगा और संबंधित राशि एनपीए नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कुछ भी असंभव नहीं है। इस क्षेत्र में दहाई अंक में वृद्धि हासिल करना मुमकिन है। अगर जमीन-जायदाद और आवास क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगा तो पूरी अर्थव्यवस्था की गति बढ़ेगी।
दिखने लगे सरकार के उपायों के सकारात्मक संकेत
नरेडको अध्यक्ष ने कहा कि सरकार के अब तक के उठाए गए कदमों से अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत दिखने लगे हैं। जरूरत है तो इसे और प्रोत्साहन देने की। उन्होंने कहा कि 31 मार्च, 2020 अथवा इससे पहले होने वाले सभी तरह के रियल एस्टेट सौदों पर स्टांप शुल्क में 50 फीसदी की कटौती पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। इससे अभी तक प्रतीक्षा कर रहे लोग भी आगे बढ़कर मकान खरीदने लगेंगे। उन्होंने कहा कि 2022 तक सभी को आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पाने के लिए देश में किरायेदारी आवासों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किरायेदारी आवास बेहतर विकल्प होगा। इसके लिए बिल्डरों की कर में छूट दी जानी चाहिए।
सभी को मिले ब्याज दर में कमी का लाभ
हीरानंदानी ने कहा कि सरकार को आवास ऋण पर लगने वाले ब्याज दर को कम कर सात फीसदी तक नीचे लाने पर विचार करना चाहिए। ब्याज दर में कमी का लाभ अंतिम ग्राहक तक पहुंचना चाहिए। इसके अलावा, सस्ती आवासीय परियोजनाओं को नए सिरे से परिभाषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी और आयकर कानून में हाल ही में सस्ते आवासों की परिभाषा को अलग-अलग संशोधित किया गया है। ऐसे में सस्ता मकान चाहने वालों को दो-दो शर्तें पूरी करनी पड़ती है। उन्होंने सस्ते आवासों के लिए 45 लाख रुपये की मूल्य सीमा को खत्म कर 60 अथवा 90 वर्गमीटर क्षेत्र वाले मकानों को ही यह लाभ देने की सिफारिश की है।
फंसी परियोजनाओं में 250 करोड़ लगाएगी एचडीएफसी
एचडीएफसी ने कहा है कि रियल एस्टेट क्षेत्र की रुकी परियोजनाओं को शुरू करने के लिए वह सरकार की अगुवाई वाले विशेष कोष में 250 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। एचडीएफसी के मुख्य कार्यकारी केकी मिस्त्री का कहना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र का पुनरुद्धार बैंकों पर अधिक निर्भर है, जो नियामकीय मुद्दों के कारण ठप पड़ी परियोजनाओं को कर्ज देने में झिझकते हैं। इससे पहले सरकार ने नवंबर, 2019 में अटकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के विशेष फंड को मंजूरी मंजूरी दी है।