बजट पेश होने में मात्र 3 दिन बचे हैं। 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से एक दिन पहले केंद्र सरकार ससंद में आर्थिक सर्वेक्षण को पेश करती है। हर साल की तरह इस बार भी 31 जनवरी को शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले दिन आर्थिक सर्वे को पेश किया जाएगा। हालांकि बजट से पहले इस आर्थिक सर्वे का अपना महत्व होता है।
आर्थिक सर्वे को पेश करने के पीछे सरकार का मकसद यह होता है कि वो जनता को बताए कि देश की अर्थव्यवस्था किस तरफ जा रही है। विकास दर, महंगाई से अर्थव्यवस्था की बयार किस तरफ बह रही है, उसके बारे में पता चलता है।
वित्त मंत्रालय में आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार करने के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार के नेतृत्व में एक टीम काम करती है। फिलहाल देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रहमण्यम हैं। इसमें अर्थव्यवस्था के क्षेत्रवार हालातों की रूपरेखा और सुधार के उपायों के बारे में बताया जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में मुख्यतः अगले दिन पेश होने वाले बजट की झलक मिलती है। आर्थिक सर्वेक्षण को वित्त मंत्रालय प्रकाशित करता है। मोटे तौर पर, यह सर्वेक्षण भविष्य में बनाई जाने वाली नीतियों के लिए एक दृष्टिकोण का काम करता है।
विस्तृत आर्थिक स्थिति में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि किन क्षेत्रों पर सरकार को ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यह सर्वेक्षण केवल सिफारिशें हैं और इन्हें लेकर कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती है और इस कारण से सरकार इन्हें केवल निर्देशात्मक रूप से लेती है।