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RBI Report: बेरोजगारी दर घटी, पर किचन का बजट बढ़ा रही महंगाई; आरबीआई की रिपोर्ट में दावा

Wed, 25 Mar 2026 04:05 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

आरबीआई ने आगाह किया है कि कच्चे तेल पर भारत की भारी निर्भरता को देखते हुए वर्तमान वैश्विक संकट पर करीबी निगरानी जरूरी है। भारत ने आयात स्रोतों में विविधता लाकर और घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर जोखिम कम करने की कोशिश की है।
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किचन का बजट बढ़ रहा - फोटो : ANI
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विस्तार
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वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। विदेशी मुद्रा और व्यापार घाटे के बढ़ते दबाव के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का मानना है कि अर्थव्यवस्था में बाहरी झटकों को सहन करने की मजबूत क्षमता है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बाद भी देश में बेरोजगारी दर में मामूली कमी आई है। विशेष रूप से बीमा, बीपीओ, आईटीईएस और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में नौकरियों के नए अवसर पैदा हुए हैं। हालांकि खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है।
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सब्जी, तेल और फलों की कीमतों में उछाल
महंगाई के आंकड़े चिंताजनक हैं। फरवरी में मुद्रास्फीति बढ़कर 3.2 फीसदी पहुंच गई, जो जनवरी में 2.7 फीसदी थी। यह उछाल मांस, मछली, खाद्य तेल, फल और सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के कारण आया है। अरहर और मूंग दालों के दाम भी बढ़े हैं। हालांकि, चावल और गेहूं की कीमतों में स्थिरता या मामूली गिरावट रही।

एफडीआई और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
अप्रैल, 2025 से जनवरी, 2026 के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगातार पांचवें महीने नकारात्मक रहा है। इस दौरान 75 फीसदी बाहरी निवेश अमेरिका, सिंगापुर, ब्रिटेन और यूएई की ओर चला गया। वस्तु व्यापार घाटे में वृद्धि से चालू खाता घाटा भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में 24.4 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई है।
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तेल और विदेशी निवेश की चुनौती
आरबीआई ने आगाह किया है कि कच्चे तेल पर भारत की भारी निर्भरता को देखते हुए वर्तमान वैश्विक संकट पर करीबी निगरानी जरूरी है। भारत ने आयात स्रोतों में विविधता लाकर और घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर जोखिम कम करने की कोशिश की है। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति शृंखला में आए व्यवधान के प्रति सरकार को सक्रिय उपाय करने होंगे।

रोजगार के मोर्चे पर सुधार के संकेत
जॉबस्पीक इंडेक्स ने भी व्हाइट कॉलर जॉब्स में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्शाई है। एक राहतभरी खबर यह भी है कि मनरेगा के तहत काम की मांग में लगातार आठवें महीने कमी आई है। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और वहां वैकल्पिक रोजगार के अवसरों की उपलब्धता के तौर पर देखा जा रहा है।
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