फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RBI: अर्थव्यवस्था मजबूत, पर वैश्विक कारणों का पड़ सकता है असर, आरबीआई मुखिया ने क्रिप्टो पर फिर जताई चिंता

Wed, 21 Dec 2022 12:39 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा, अन्य देश भले ही क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अलल-अलग नजरिया अपना रहे हैं, लेकिन आरबीआई इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के अपने रुख पर कायम रहना चाहेगा। 
विज्ञापन
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिदास - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बिटकॉइन जैसे सट्टा उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत करते हुए कहा कि निजी क्रिप्टोकरेंसी की वजह से अगला वित्तीय संकट आ सकता है। इस पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।

विज्ञापन


ऐसे उपकरणों के कट्टर विरोधी रहे गवर्नर ने बुधवार को कहा कि क्रिप्टोकरेंसी व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है। हम हमेशा इसके बारे में सजग करते आ रहे हैं। यह 100 फीसदी सट्टा है। इसलिए मैं अब भी मानता हूं कि क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। अगर आप इसे विनियमित (रेगुलेट) करने का प्रयास करते हैं और बढ़ने देते हैं तो कृपया मेरे शब्दों को याद रखें कि अगला वित्तीय संकट निजी क्रिप्टोकरेंसी से आ सकता है। 

एक कार्यक्रम में केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा, अन्य देश भले ही क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अलल-अलग नजरिया अपना रहे हैं, लेकिन आरबीआई इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के अपने रुख पर कायम रहना चाहेगा क्योंकि इसका कोई निर्धारित मूल्य नहीं है। इसमें लगातार गिरावट आ रही है। एजेंसी
विज्ञापन


ध्वस्त हुआ एफटीएक्स सबसे बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी
एक कार्यक्रम में दास ने अपनी बात का समर्थन करते हुए पिछले एक साल के घटनाक्रमों का जिक्र किया। कहा, कैसे क्रिप्टोकरेंसी के कारण एक्सचेंज एफटीएक्स पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। इसे अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी में से एक माना जाता है। ऐसी घटनाएं आने वाले खतरे को दर्शाती हैं।

गवर्नर ने कहा, एफटीएक्स के नए एपिसोड देखने के बाद मुझे नहीं लगता कि कुछ और कहने की जरूरत है। निजी क्रिप्टोकरेंसी का मूल्यांकन लगातार गिर रहा है। मूल्यांकन 190 अरब डॉलर से घटकर 140 अरब डॉलर रह गया है।

दास ने कहा कि निजी क्रिप्टोकरेंसी की उत्पत्ति में प्रणाली (सिस्टम) को ध्वस्त करने का इरादा निहित है। इसे प्रणाली को बायपास करने और हराने के लिए ही बनाया गया था। ये केंद्रीय बैंकों की ओर से शुरू की गईं फिएट मुद्राओं और विनियमित वित्तीय प्रणाली में भरोसा नहीं करते हैं।

आर्थिक बुनियाद मजबूत, बाहरी कारकों से जीडीपी को नुकसान
गवर्नर ने कहा कि तेजी से बढ़ने वाले 70 संकेतक बता रहे हैं कि भारत में बुनियादी आर्थिक गतिविधियां मजबूत हैं, लेकिन बाहरी कारकों से अर्थव्यवस्था को कुछ नुकसान होगा। ये कारक दुनिया के एक बड़े हिस्से में मंदी के डर से प्रेरित है, जहां चुनौतियां हैं। हालांकि, भारतीय वित्तीय क्षेत्र लचीला बना हुआ है और काफी बेहतर स्थिति में है। इस उपलब्धि के लिए नियामक और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों दोनों को श्रेय देना चाहिए। 

दास ने कहा, महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच बेहद समन्वित प्रयास रहा है। मौद्रिक नीति महंगाई और विकास पर घरेलू कारकों से निर्देशित होती रहेगी। अमेरिकी फेडरल बैंक की कार्रवाई जैसी अन्य इनपुट को भी ध्यान में रखेगी। केंद्रीय बैंक ने इस महीने की शुरुआत में 2023-24 के लिए अपने वृद्धि अनुमान को 7 फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया।

‘इतिहास वाले केंद्रीय बैंक गवर्नर’ बोले...क्या दिग्गज फुटबॉलर मेसी ने भी इतिहास पढ़ा है
दास ने ‘इतिहास वाले केंद्रीय बैंक गवर्नर’ के ताने का चतुराई से जवाब देते हुए कहा, क्या अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनल मेसी भी इतिहास में स्नातकोत्तर हैं। दरअसल, एक कार्यक्रम में दास की तुलना कतर में फुटबॉल मैदान में मेस्सी का सामना करने वाले प्रतिद्वंद्वी से की गई। इस पर उन्होंने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन, क्या मेसी ने भी इतिहास की पढ़ाई की थी। मुझे याद दिलाया जाता है कि मैंने इतिहास पढ़ा है। दास 28 साल में केंद्रीय बैंक के पहले गैर-अर्थशास्त्री गवर्नर हैं।

बहुत शानदार नहीं है कर्ज में बढ़ोतरी का आंकड़ा
आरबीआई गवर्नर ने बुधवार को कहा कि देश में कर्ज वृद्धि ग्रोथ की हालत अभी ऐसी नहीं है कि इसे बेहद शानदार या उत्साहजनक कहा जा सके। जमा वृद्धि और कर्ज में बढ़ोतरी के वास्तविक आंकड़ों को देखें तो इनमें कोई बड़ा अंतर भी फिलहाल देखने को नहीं मिल रहा है। लेकिन, देश में कर्ज में वृद्धि अब भी काफी स्थिर है।

हम स्थिति पर लगातार बारीकी से नज़र रख रहे हैं। जमा वृद्धि और कर्ज में बढ़ोतरी के आंकड़ों में जो भारी अंतर दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ आधार प्रभाव की वजह से है। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्ज वृद्धि दो वर्षों की सुस्ती के बाद ऊपर की तरफ बढ़ रही है। पूर्ण संख्या में कर्ज वृद्धि 2 दिसंबर, 2022 तक 19 लाख करोड़ रुपये रही। इस दौरान जमा वृद्धि 17.5 लाख करोड़ रुपये थी।
विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें