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बूस्टर डोज: 'उभरते सितारे' फंड लॉन्च करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, छोटी कंपनियां हासिल करेंगी बड़ा मुकाम

Sat, 21 Aug 2021 11:53 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण निर्यात उन्मुख छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के लिए उभरते सितारे फंड की शुरुआत करेंगी। 
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : Youtube: PIB India
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विस्तार
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देश में छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को सहारा देने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। आज केंद्र सरकार इन्हें एक और तोहफा देने जा रही है। सरकार ने इन उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए एक फंड बनाया है, जिसे 'उभरते सितारे' नाम दिया गया है। ये फंड उन कंपनियों को दिया जाएगा जो एक्सपोर्ट ओरिएंटेड काम करती हैं। यह फंड एक्जिम बैंक और सिडबी द्वारा संयुक्त रूप से प्रायोजित है। आज लखनऊ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे लॉन्च करेंगी।

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इस फंड का साइज 250 करोड़ रुपये का होगा और जरूरत पड़ने पर इसे 500 करोड़ रुपये का बनाया जाएगा। सीतारमण ने 2020 में अपने बजट भाषण में कहा था कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) अर्थव्यवस्था के पहियों को गतिमान रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये रोजगार पैदा करते हैं, इनोवेशन करते हैं और साथ ही जोखिम भी उठाते हैं। 

सालाना 500 करोड़ रुपये से कम होना चाहिए टर्नओवर 
यह इंडिया एक्जिम बैंक और सिडबी द्वारा 40-40 करोड़ रुपये के अंशदान से संयुक्त रूप से प्रायोजित है। इसके लिए उन्होंने फार्मा, ऑटो पुर्जे, इंजीनियरिंग सॉल्यूशन, कृषि और सॉफ्टवेयर आदि से लगभग 100 संभावित कंपनियों की पहचान की है। यदि आप भी उभरते सितारे प्रोग्राम के तहत फंड पाना चाहते हैं, तो ध्यान रहे कि आपकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से कम होना चाहिए। 
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आर्थिक सहायता के साथ मिलेगी तकनीकी मदद 
उभरते सितारे प्रोग्राम के तहत आपको ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) से मदद मिलेगी। इसकी सबसे खास बात ये है कि प्रोग्राम के तहत  आर्थिक सहायता के साथ-साथ आपको तकनीकी मदद यानी एडवाइजरी सर्विस भी मिलेगी। इसके दायरे में दोनों सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। 

उभरते सितारे कार्यक्रम (यूएसपी) के अंतर्गत ऐसी भारतीय कंपनियों को चिह्नित किया जाता है, जो फ्यूचर चैंपियन हैं और उनमें निर्यातों की अच्छी संभावनाएं हैं। इसके तहत चिह्नित कंपनी का तकनीकी, उत्पाद अथवा प्रोसेस के लिहाज से बेहतर स्थिति में होना ज़रूरी है। ऐसी कंपनी यदि फिलहाल अंडर-परफॉर्मिंग है या बड़ी कंपनी के रूप में उभरने के लिए अपनी क्षमताओं का पूरा दोहन नहीं कर पा रही है, तो भी उसे सहायता दी जा सकती है। यह कार्यक्रम ऐसी कंपनियों की बाधाओं का पता लगाकर उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार इक्विटी, ऋण और तकनीकी सहयोग प्रदान करता है।

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