अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए व्यापक आयात शुल्क को अवैध करार दे दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में हलचल तेज हो गई है। भारत में पीयूष गोयल के नेतृत्व वाला वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इस फैसले और इसके बाद अमेरिका की ओर से उठाए गए नए व्यापारिक कदमों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का बारीकी से अध्ययन कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप का नया दांव
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से दिए गए अपने फैसले में कहा कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप ने 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके अपने अधिकारों का दायरा लांघा है। कोर्ट ने साफ किया कि आयात शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत केवल वहां की संसद (कांग्रेस) को दिया गया है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इसे सबसे बड़े कानूनी झटकों में से एक माना जा रहा है।
हालांकि, इस झटके के कुछ ही घंटों बाद, ट्रंप ने 1974 के 'ट्रेड एक्ट' की धारा 122 के तहत दुनिया भर के सामानों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का नया 'ग्लोबल टैरिफ' लगाने की घोषणा कर दी। व्हाइट हाउस के अनुसार यह नया शुल्क 24 फरवरी को रात 12:01 बजे से लागू हो जाएगा और यह मौजूदा आयात शुल्कों के ऊपर लगाया जाएगा।
भारत सरकार का रुख
शनिवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने वाशिंगटन में हुए इस घटनाक्रम पर नई दिल्ली की तरफ से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा, "हमने कल टैरिफ पर आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गौर किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया है। अमेरिकी प्रशासन ने कुछ नए कदमों का ऐलान किया है। हम इन सभी घटनाक्रमों और इनके प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं"।
व्यापारिक समीकरण और भारत पर प्रभाव
भारत के लिए यह पूरा घटनाक्रम इसलिए बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में ट्रंप प्रशासन के साथ एक बहुप्रतीक्षित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत, भारत पर लगने वाले 50 प्रतिशत के टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था। इससे पहले, भारत की ओर से रूसी कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ लगा दिया था।
उसके बाद दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत के बाद अमेरिका ने इस 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को वापस ले लिया था। इसके बाद आपसी व्यापार के तहत लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया था। अब 24 फरवरी से नया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू होने से भारतीय निर्यातकों के लिए स्थितियां फिर से बदल सकती हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वैश्विक व्यापार पर अमेरिका की नीति के भविष्य पर गहरा असर डालने वाला है। वहीं, भारत के नीति-निर्माता और उद्योग जगत अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि 24 फरवरी से लागू होने वाले नए शुल्क नियम भारतीय सामानों की अमेरिकी बाजार में पहुंच को कैसे प्रभावित करते हैं। वाणिज्य मंत्रालय की मौजूदा समीक्षा के आधार पर ही भारत अमेरिका के साथ आगे की व्यापारिक रणनीति और बातचीत की दिशा तय करेगा।