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डेबिट कार्ड फीस में कमी के बावजूद छोटे कारोबारियों में रोष, कहा- महंगा हो जाएगा ट्रांजेक्शन करना

Fri, 08 Dec 2017 02:34 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा छोटे कारोबारियों में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए पीओएस मशीन पर ट्रांजेक्शन दर (एमडीआर) को घटाने का फैसला किया था। इससे लगा था कि लोगों को डेबिट कार्ड से पेमेंट करना सस्ता हो जाएगा, लेकिन अब आरबीआई के आदेश से कारोबारी खुश नहीं है। 
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कस्टमर पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
छोटे दुकानदारों के मुताबिक, इससे उनका खर्चा बढ़ जाएगा और ग्राहकों पर इसका बोझ डालना पड़ेगा। खासतौर पर उन दुकानदारों पर जिनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपये से अधिक है। 

इतना हो जाएगा एमडीआर
आरबीआई ने 1 जनवरी 2018 से एमडीआर की जो दरें तय की हैं, उसके मुताबिक 20 लाख तक कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों पर स्वाइप मशीन से ट्रांजेक्शन कर 0.4 फीसदी या 200 रुपये (जो भी कम हो) वो लगेगा। वहीं इससे बड़ा कारोबार करने वालों पर 0.9 फीसदी या 1000 रुपये चार्ज लगेगा।  यदि ट्रांजेक्शन क्विक रिस्पांस (क्यूआर) कोड पर आधारित होगा तो एमडीआर में और कमी होगी। यह आदेश आगामी एक जनवरी से लागू होगा।
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एमडीआर को दूसरे शब्दों में ट्रांजेक्शन फीस भी कहते हैं जो कारोबारी पर लगता है। यह शुल्क कार्ड जारी करने वाली वित्तीय संस्था लेती हैं। बड़े दुकान, मॉल, होटल वगैरह इस फीस का बोझ खुद ही उठाते हैं, जबकि छोटे और मंझोले दुकानदार यह शुल्क ग्राहकों से वसूलते हैं।

रिजर्व बैंक द्वारा बुधवार को डेबिट कार्ड पर देय एमडीआर के बारे में जारी एक पत्र के मुताबिक नई व्यवस्था में ट्रांजेक्शन की रकम के बजाए व्यापारी के कुल कारोबार को एमडीआर का आधार बनाया गया है।
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QR कोड के लिए भी अलग दरें

कैशलेस पेमेंट
इसके साथ ही प्वाइंट ऑफ सेल्स यानी पॉस मशीन और क्विक रिस्पांस यानी क्यूआर कोड के लिए दरें अलग-अलग तय की गई है। इस व्यवस्था में बीते साल जिस कारोबारी ने 20 लाख रुपये तक का कारोबार किया होगा, उन्हें छोटा जबकि इस रकम से ज्यादा का कारोबार करने वालों को बड़ा व्यापारी माना गया है।

छोटे कारोबारी के लिए पॉस पर एमडीआर की दर 0.40 फीसदी तक हो सकती है। मतलब कि 1,000 रुपये की खरीद पर चार रुपये का एमडीआर। इस तरह के व्यापारी से खरीदारी पर ग्राहक को अधिकतम 200 रुपये का एमडीआर देना होगा। इनके यहां यदि क्यूआर कोड के आधार पर ट्रांजेक्शन होता है तो एमडीआर अधिकतम 0.30 फीसदी और ज्यादा से ज्यादा 200 रुपये ही हो सकता है।

बड़े कारोबारी के लिए एमडीआर की दर अधिकतम 0.90 फीसदी तक होगी। मतलब एक हजार रुपये के लेन-देन पर नौ रुपये का एमडीआर। क्यूआर कोड की सूरत में एमडीआर की दर 0.8 फीसदी होगी। दोनों ही स्थिति में एक ट्रांजेक्शन पर एमडीआर ज्यादा से ज्यादा 1,000 रुपये हो सकता है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर की यही दरें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए भी लागू होंगी।

1,000 रुपये से कम की खरीदारी पर बढ़ेगा शुल्क
अभी 1,000 रुपये के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर की दर 0.25 फीसदी है, यानी ज्यादा से ज्यादा ढाई रुपये। वहीं 1,000 रुपये से ज्यादा लेकिन 2,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर की दर 0.5 फीसदी है। दोनों ही दरें छोटे-बड़े सभी कारोबारियों के लिए एक समान हैं।

2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर के लिए कोई सीमा तय नहीं है। एमडीआर में अधिकतम रकम की भी कैपिंग नहीं है। इसका आशय यह है कि नई व्यवस्था में 1,000 रुपये से कम की डेबिट कार्ड खरीदारी पर एमडीआर की दर ढाई रुपये से बढ़कर चार से नौ रुपये के बीच हो जाएगी।
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