अमेरिका की ओर से भारत से निर्यात प्रोत्साहन सुविधा को वापस लेने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। इससे घरेलू निर्यातकों पर प्रभाव पड़ेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने सोमवार को कहा कि भारत का जीएसपी दर्जा (सामान्य तरजीही प्रणाली) समाप्त किए जाने से हमें और विशेषकर छोटे उत्पादों के निर्यातकों को नुकसान होगा। इन लाभों को वापस लिए जाने से भारतीय और अमेरिकी कंपनियों दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।
किर्लोस्कर ने कहा कि जीएसपी दर्जा समाप्त किए जाने से सिर्फ हमारे ऊपर ही असर नहीं होगा बल्कि इससे दोनों पक्ष प्रभावित होंगे। इससे अमेरिकी विनिर्माताओं की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी क्योंकि उनकी लागत कम होगी। जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिका का दो-तिहाई आयात होता है।
इसमें उत्पादों के विनिर्माण के लिए कच्चे माल और कलपुर्जे शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कई महंगे सामान पर शुल्क समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि 2016 और 2017 में जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी आयातकों को 73 करोड़ डॉलर की बचत हुई। इससे अमेरिकी कंपनियों ने 89.4 करोड़ डॉलर बचाए।
इस मुद्दे पर भारतीय व्यापार संवर्द्धन परिषद (टीपीसीआई) का कहना है कि अमेरिका द्वारा जीएसपी दर्जा वापस लेने के फैसले का भारत जवाब देगा। आगामी महीनों में जवाबी शुल्क लगाया जाएगा। टीपीसीआई के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि इस लाभ को वापस लेने से खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि भारतीय निर्यातक इस चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि अमेरिका के इस निर्णय से भारतीय निर्यातकों पर मामूली प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, जीएसपी के तहत तीन फीसदी या उससे अधिक लाभ वाले उत्पादों के संबंध में निर्यातकों को इसके नुकसान की भरपाई में मुश्किलें आ सकती हैं।
ऐसे में सरकार को आभूषण, चमड़े की वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, प्लास्टिक, प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यातकों की मदद मुहैया करानी चाहिए।