Trade: विदेश व्यापार महानिदेशालय ने भारत से ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन जाने वाले सामान को प्रमाणित करने वाली लैब में बदलाव किया है। मनुष्यों और जानवरों के इस्तेमाल में लाए जाने वाले उत्पादों को निर्यात समीक्षा आयोग यानि ईआईसी स्वीकृत लैब के माध्यम से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया है।
भारत से ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन जाने वाले हर्बल फूड सप्लिमेंट का निर्यात अब संकट में फंसा है। बीते 31 जुलाई को नियमों में बदलाव के चलते बीते 10 दिन से दिल्ली, मुंबई और बैंग्लोर के हवाईअड्डों पर पड़ा है। इसे लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लघु उद्योग भारती संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगते हुए नियमों पर फिर से विचार करने के लिए पत्र लिखा है। संगठन के अनुसार, देश में हर साल 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्बल उत्पादों का निर्यात किया जाता है जिसका बड़ा हिस्सा यूरोप और ब्रिटेन को जाता है।
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जानकारी के अनुसार, विदेश व्यापार महानिदेशालय ने भारत से ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन जाने वाले सामान को प्रमाणित करने वाली लैब में बदलाव किया है। मनुष्यों और जानवरों के इस्तेमाल में लाए जाने वाले उत्पादों को निर्यात समीक्षा आयोग यानि ईआईसी स्वीकृत लैब के माध्यम से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया है। पिछले माह तक यह सर्टिफिकेट शेफेक्सिल यानि शेलैक एंड फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की ओर से जारी किए जा रहे थे।
पीएम नरेंद्र मोदी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलदेव भाई प्रजापति ने कहा है कि इस आदेश से ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के देशों में निर्यात किया जाने वाला सैकड़ों करोड़ रुपए का माल फंस गया है। उन्होंने लिखा है कि सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करते हुए राहत देने के बारे मे सोचना चाहिए और पुरानी व्यवस्था को ही जारी रखना चाहिए। संगठन ने यह भी कहा है कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया तो न केवल निर्यातकों बल्कि इस दिशा में लगे कृषि क्षेत्र के लोगों को भी बड़ा नुकसान होने की आशंका है।