सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय समूह में मौजूद सभी सदस्यों ने एकमत राय रखी कि ऐसे संभव सभी कदम सरकार को उठाने चाहिए, जिससे सोशल मीडिया फेक न्यूज फैलाने का जरिया न बने। हालांकि इन सभी प्रस्तावों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फैसला लेंगे, जिनको जीओएम अपनी रिपोर्ट आगे चलकर सौंपेगा।
हर जिले में तैनात हो एसपी स्तर का नोडल ऑफिसर
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में हर जिले में एक एसपी स्तर के अधिकारी को भी नियुक्त करने का भी सुझाव दिया है। यह अधिकारी सभी भीड़ हिंसा वाले मामलों को देखेगा। यह अधिकारी उन लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करेगा, जो इसके लिए दोषी होंगे।
हो सकती है इतनी सजा
कंपनियों के निदेशक और मैनेजर्स को दोषी पाए जाने पर पांच साल की सजा देने का भी प्रावधान है। फेसबुक, व्हाट्सएप, गूगल और ट्विटर जैसी कंपनियां बार-बार सरकार को अपनी तरफ से इन फर्जी खबरों पर रोक लगाने की बात कर रही हैं, लेकिन अभी तक इन कंपनियों ने ऐसा कुछ खास नहीं किया है। हालांकि यह रिपोर्ट उस समय पेश की गई है, जब सरकार व्हाट्सएप पर एक्शन लेने के लिए पूरी तरह से अपना मन बना चुकी है।