केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा फसल वर्ष 2018-19 के लिए दिये गए पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार इस साल सोयाबीन का उत्पादन बढ़ रहा है। इस वर्ष सोयाबीन का रकबा 6.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 112.6 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसी तरह सोयाबीन का उत्पादन भी 134.6 लाख टन रहने की संभावना है जो कि एक साल पहले के उत्पादन के मुकाबले 22.5 फीसदी अधिक है।
10 फीसदी ज्यादा होगा खाद्य तेलों का आयात
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अक्तूबर-दिसंबर की तिमाही में 24 लाख टन खाद्य तेलों की खरीद करेगा जो कि एक साल पहले की इसी अवधि के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है। इसी के साथ यहां सोयाबीन, सरसों और तोरिया जैसी तिलहनी फसलों का उत्पादन भी बंपर रहने वाला है। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी।
पाम तेल के भाव न्यूनतम स्तर पर
मलयेशियाई पाम ऑयल के भाव इस समय तीन साल के न्यूनतम स्तर पर हैं। इस साल इसकी कीमतें 12 फीसदी घट चुकी हैं और आने वाले समय में इसके और नीचे जाने की संभावना जताई जा रही है। पाम तेल के एक आयातक का कहना है कि मलयेशिया में पिछले साल कच्चे पाम ऑयल का भाव 2,660 रिंगित था जो कि अभी घट कर 2,220 रिंगित रह गया है। जब पाम ऑयल का भाव कम रहेगा तो सोयाबीन तेल के भाव पर भी दवाब बना रहेगा। वैसे भी भारत में अधिकतर नमकीन और भुजिया बनाने वाले पाम ऑयल का ही उपयोग करते हैं।