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H-1B वीजा: ट्रंप के आदेश से अमेरिकी कंपनियों को हुआ 100 अरब डॉलर का नुकसान

Fri, 23 Oct 2020 04:33 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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H-1B Visa - फोटो : pixabay
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी और एल1 वीजाधारकों सहित कुशल विदेश कामगारों के प्रवेश को रोकने वाले कार्यकारी आदेश से अमेरिकी कंपनियों को करीब 100 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक ने यह दावा किया है। 

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22 जून को ट्रंप ने लगाई थी रोक 
मालूम हो कि ट्रंप ने 22 जून को एक कार्यकारी आदेश के जरिए नए एच-1बी और एल-1 वीजा जारी करने पर 31 दिसंबर 2020 तक रोक लगाई थी। ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूट द्वारा इस सप्ताह जारी रिपोर्ट में कहा गया कि इस आदेश से फॉर्च्यून 500 कंपनियों के मूल्यांकन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और उन्हें 100 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। 




क्या है एच-1बी वीजा?
एच-1बी गैर-आव्रजक वीजा होता हैं, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को विशेष तकनीकी दक्षता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति होती है। इस वीजा के जरिए प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से हजारों कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। 
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दो लाख विदेशी श्रमिकों के प्रवेश पर रोक
ब्रुकिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि इस आदेश ने करीब दो लाख विदेश श्रमिकों और उनके आश्रितों के प्रवेश पर रोक लगा दी। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इस तरह आव्रजन पर लगाम लगाने के उपायों से अमेरिकी फर्मों पर स्थायी रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, और कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद आर्थिक सुधार की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। 

इस बीच अमेरिकी आव्रजन परिषद ने गुरुवार को कहा कि गृह सुरक्षा विभाग द्वारा विदेशी छात्रों के प्रवेश की अवधि को सीमित करने के एक नए प्रस्ताव से वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को भारी नुकसान होगा।

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