सेंसेक्स-निफ्टी
2024 में सेंसेक्स ने 8.94 फीसदी और निफ्टी ने 9.82 फीसदी का रिटर्न दिया। सितंबर तक रिटर्न 18 फीसदी से ऊपर था। उसके बाद बाजार से विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों के मुनाफे को आधा कर दिया।
2025 में उम्मीद
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में वापसी करेंगे। इस साल की तरह आईपीओ बाजार गुलजार रहेगा। इससे बाजार को अच्छा सपोर्ट मिलेगा। कॉरपोरेट आय वृद्धि में अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर रिटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। फिर भी इक्विटी से कम से कम 10 फीसदी रिटर्न की उम्मीद है। कुल निवेश का 50 फीसदी हिस्सा इक्विटी में लगा सकते हैं। इंजीनियरिंग, कैपिटल गुड्स, रियल एस्टेट और डिजिटलीकरण, ग्रामीण थीम वाले स्टॉक और फ्लेक्सीकैप का चयन कर सकते हैं।
सोना-चांदी
देशों के बीच तनाव और महंगाई के चलते 2024 में दोनों बहुमूल्य धातुओं ने 24 व 17 फीसदी रिटर्न दिया। हालांकि, दूसरी तिमाही में रिटर्न ज्यादा था, पर साल के अंत तक इसमें गिरावट आ गई।
2025 में उम्मीद
कुल निवेश का 10-15 फीसदी निवेश सोने में करें। सोने में 2024 वाला रिटर्न मिलना मुश्किल है, फिर भी यह इक्विटी से ज्यादा यानी 12-15 फीसदी रिटर्न दे सकता है। 2025 में 90,000 रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकता है।
म्यूचुअल फंड
इस साल म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों ने 50 फीसदी तक का मुनाफा दिया है। साल के अंत में इक्विटी बाजार की गिरावट से इसका भी रिटर्न घट गया।
2025 में उम्मीद
इक्विटी बाजार की तेजी का असर दिखेगा। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमें 20 से 35 फीसदी तक रिटर्न दे सकती हैं। कुल निवेश का 10 फीसदी हिस्सा एसआईपी के रूप में लगाएं। मासिक एसआईपी अब 25,000 करोड़ रुपये के पार है। करीब 7 करोड़ नए एसआईपी खाते खुले हैं। कम से कम तीन साल के लिए निवेश करें।
एफडी और पीएफ
2024 में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर 7 फीसदी से लेकर 9.40 फीसदी तक ब्याज मिला है। पीएफ पर 8.1 फीसदी ब्याज मिला है।
2025 में उम्मीद
केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करते हैं तो सीधा असर एफडी और पीएफ पर होगा। यानी इन दोनों की भी दरें घट सकती हैं। फिर भी 5-10 फीसदी निवेश कर सकते हैं।
महंगाई
2024 में खाने-पीने के साथ कमोडिटी की महंगाई दर दुनिया में ऊंची बनी रही। असर यह हुआ कि ब्याज दरें ऊंची रहीं। इससे शहरी क्षेत्रों में खर्च करने की क्षमता घट गई। ग्रामीण इलाकों में खर्च जरूर ज्यादा हुआ, पर वह अर्थव्यवस्था को धार देने में बहुत योगदान नहीं कर पाया। असर यह हुआ कि वैश्विक स्तर के साथ भारत में भी विकास दर में भारी गिरावट आई।
2025 में क्या होगा
देशों के बीच तनाव घटता है, फसलों का उत्पादन अच्छा होता है, मौसम औसत रहता है तो महंगाई दर में कमी आ सकती है। इससे ब्याज दरें कम होंगी। इससे लोग खर्च ज्यादा करेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ सकती है। भारत में आगामी बजट में भी इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। खासकर, टैक्स के मामले में सरकार मध्य वर्ग को राहत दे सकती है।
ब्याज दरें
देश में पिछले करीब दो साल से ब्याज दरें बहुत ज्यादा बनी हुईं हैं। कोरोना में राहत देने के लिए आरबीआई ने कई चरणों में रेपो दर में भारी कटौती की थी। बाद में दरों को लगातार बढ़ाकर कई सालों के उच्च स्तर 6.5 फीसदी पर ला दिया जो अब भी स्थिर है।
2025 में क्या होगा
उम्मीद है आरबीआई फरवरी में पहली बैठक में रेपो दरों को घटा सकता है। ऐसा होता है तो ऊंची ब्याज दरों के कम होने का चक्र शुरू होगा। इससे खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार भी मिलेगी।
डेट-फिक्स्ड इनकम
लंबी अवधि के फिक्स्ड इनकम पर 2024 में अच्छा ब्याज मिला था। ऐसा इसलिए, क्योंकि दुनियाभर केे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ा रहे थे। इससे इन साधनों पर भी दरें बढ़ गई थी।
2025 में उम्मीद
2024 जितना ब्याज नहीं मिल सकता है, क्योंकि बॉन्ड पर ब्याज कम होने व दरों में कटौती की गुंजाइश है। कम समय में अच्छा रिटर्न मिल सकता है। कुल निवेश का 10 फीसदी लगा सकते हैं।