सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को यह तय करने का निर्देश दिया कि एक मार्च से 31 मई के बीच कर्ज पुनर्भुगतान (लोन रीपेमेंट) पर तीन महीने के रोक पर उसके परिपत्र (सर्कुलर) का पालन किया जा रहा है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि बैंक की तरफ से कर्जदारों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि ऐसा लगता है कि आरबीआई की तरफ से दिए गए लाभ को उधारकर्ताओं तक नहीं बढ़ाया गया है।
एक अर्जी दी गयी थी कि चूंकि 27 मार्च के परिपत्र को अक्षरश: लागू नहीं किया गया है इसलिए इसे खत्म करना चाहिए ।
हालांकि, जस्टिस एन वी रमना, संजय किशन कौल और बी आर गवई की एक बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरबीआई सर्कुलर से जुड़ी चार जनहित याचिकाएं उठाईं, कहा कि याचिकाकर्ता प्रभावित पक्ष नहीं हैं, इसलिए वह परिपत्र को लेकर दखल नहीं दे रही है।
कमल कुमार कालिया की तरफ से दायर एक जनहित याचिका में पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'हमने भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देशित किया कि वह अपने पत्र और भावना में 27 मार्च, 2020 के परिपत्र को लागू करने के लिए सुनिश्चित करे।'
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील साजू जैकब से पूछा कि वह बताएं कि याचिकाकर्ता ने कितना कर्ज लिया है क्योंकि कोई भी प्रभावित व्यक्ति आगे नहीं आया है ।