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होम लोन लेने का अभी है सही वक्त... घट रही एमसीएलआर और रेपो से जुड़ी ब्याज दर

Mon, 24 Feb 2020 04:37 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : Social Media
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अगर आप मकान खरीदने के लिए होम लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो यही सबसे उपयुक्त समय है। ऐसा इसलिए, क्योंकि रिजर्व बैंक ने 2019 में सस्ते कर्ज दिलाने के लिए दो बड़े कदम उठाए।

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एक तरफ सभी बैंकों को खुदरा कर्ज की ब्याज दरें बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने को कहा, तो दूसरी ओर रेपो रेट में लगातार कटौती कर एमसीएलआर की मौजूदा व्यवस्था में भी दरें घटाने को बाध्य किया। ऐसे मेें बैंक आपको किसी भी बेंचमार्क से जुड़ा लोन पेश करेंगे तो वह पूर्व की तुलना मेें सस्ता ही पड़ेगा।

क्या कहता है एमसीएलआर 

आरबीआई ने फरवरी से अक्तूबर 2019 तक रेपो रेट में पांच बार लगातार कटौती कर 135 आधार अंक घटा दिया, लेकिन बैंकों ने दिसंबर, 2019 तक सीमांत उधारी लागत दर (एमसीएलआर) से जुड़े कर्ज में सिर्फ 44 आधार अंक की ही कटौती की।

इसके बाद पिछली दो एमपीसी बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को स्थिर रखा, फिर भी बैंकों ने अपनी फंडिंग लागत और खर्च पर काबू पाकर एमसीएलआर में कटौती जारी रखी और इसमें आगे भी कटौती की उम्मीद है।

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बैंकर्स का कहना है कि मौजूदा कर्ज में से 80 फीसदी अब भी एमसीएलआर से जुड़े हैं। मौजूदा समय में एसबीआई की एमसीएलआर 7.85 फीसदी है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा ने 12 फरवरी से अपनी एमसीएलआर 8.15 फीसदी निर्धारित की है। इसी तरह, अन्य बैंक भी एमसीएलआर से जुड़े कर्ज को सस्ता करने की तैयारी में है। 

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कितनी कारगर है रेपो रेट 

रिजर्व बैंक ने अपनी आधार दरों में होने वाली कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए ही बैंकों से 1अक्तूबर, 2019 से सभी खुदरा कर्ज की ब्याज दरें बाहरी बेंचमार्क पर तय करने को कहा था। अभी तक एसबीआई सहित तमाम सरकारी बैंक अपनी दरों को रेपो रेट से जोड़ चुके हैं।

हालांकि, अक्तूबर के बाद से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं ने रेपो से जुड़े कर्ज को अपनाना चाहा, उन्हें फिलहाल और कटौती का लाभ नहीं मिला है।

आरबीआई की मौजूदा रेपो दर 5.15 फीसदी है और नए कर्ज की दरें इसी को आधार मानकर तय की जा रही हैं। ऐसे में अगर अप्रैल की एमपीसी बैठक में आरबीआई रेपो रेट घटाता है, तो जितनी कटौती केंद्रीय बैंक करेगा, उतना ही आपका लोन भी सस्ता हो जाएगा।

ऐसे करें नफा-नुकसान की गणना

एक आंकड़े के मुताबिक, मार्च 2019 तक लगभग सभी सरकारी बैंक 8.95 फीसदी ब्याज (एमसीएलआर) पर 30 से 70 लाख रुपये तक के लोन की पेशकश करते थे। अगर किसी व्यक्ति ने मार्च 2019 में कर्ज लिया था, तो एक साल बाद मार्च 2020 में जब इसकी दरों का पुनर्निधारण होगा तो यह 8.30 फीसदी के आसपास हो सकती हैं।

इसी तरह, अगर कोई उपभोक्ता अपने कर्ज को एमसीएलआर से शिफ्ट कर रेपो लिंक ब्याज दर में ले जाता है, तो मार्च 2020 में उसकी ब्याज दर 8.20 फीसदी के आसपास हो सकती है। ऐसे में दोनों ही आधार पर कर्ज की ब्याज दरों में सिर्फ 10 आधार अंक का अंतर दिख रहा है।

कमोबेश यही हालात निजी क्षेत्र के बैंकों के भी होेंगे, जो अभी 35-70 लाख रुपये तक कर्ज पर 8.40-9.05 फीसदी ब्याज की पेशकश करते हैं। यहां भी अगर किसी ग्राहक ने मार्च 2019 में 9.20 फीसदी ब्याज पर कर्ज लिया था, तो उसे मार्च 2020 में 8.60 फीसदी की पेशकश हो सकती है। 
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