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ब्लैक मनी: स्विस बैंकों में जमा कथित कालेधन पर क्या मीडिया में हुई गलत रिपोर्टिंग? सरकार और विपक्ष में बढ़ी रार

Sat, 19 Jun 2021 02:28 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शुक्रवार को मीडिया में ऐसी खबरें चलीं कि स्विस बैंकों में जमा धन में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सरकार ने कहा है कि यह कालेधन से जुड़ा मामला नहीं है। दोनों देशों की कंपनियों में आपसी व्यापार जैसी वजहों से जमा धन में वृद्धि हुई है...
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स्विस बैंक - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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शुक्रवार को मीडिया में इस तरह की खबरें आईं कि कोरोना महामारी में भी भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में रिकॉर्ड धन जमा किया गया। वर्ष 2020 में स्विस बैंकों में जमा किये गये 20,700 करोड़ रुपयों को पिछले 13 वर्ष में सबसे ज्यादा बताया गया है। लेकिन केंद्र सरकार ने इस जमाधन को कालेधन से जोड़ने का खंडन किया है। सरकार ने कहा है कि यह आंकड़ा स्विस बैंकों के द्वारा अपने कामकाज के बारे में स्विस नेशनल बैंक को दी गई जानकारी पर आधारित है। जमाधन में यह वृद्धि बैंकों, भारत-स्विट्जरलैंड के बीच काम कर रही कंपनियों के कामकाज और वित्तीय लेनदेन में आई बढ़ोतरी के कारण हुआ है। इसे कालाधन कहना उचित नहीं है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस मामले में स्विट्जरलैंड की सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।

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मुख्यतया कालाधन उसे कहा जाता है, जो बेनामी संपत्तियों के माध्यम से टैक्स अदा करने से बचते हुए इन बैंकों में जमा किया जाता है। लेकिन, शनिवार को इस मामले पर विस्तृत सफाई देते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले को बेनामी संपत्तियों के रूप में नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि ये लेनदेन प्रमाणित खातों, व्यक्तियों और कंपनियों के बीच हुआ है। दोनों देशों की सरकारों के प्रयास के कारण इन्हीं दिनों में दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इसे कालेधन से इसलिए नहीं जोड़ा जा सकता क्योंकि ये लेनदेन नियमों के तहत और अपेक्षित टैक्स चुकाते हुए किये गये हैं।

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मीडिया में ये हुई रिपोर्टिंग

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के द्वारा जमा धन में भारी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2019 के अंत में स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा धन 6625 करोड़ था जो 2020 के अंत में बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये हो चुका है। जबकि इसके पहले के दो वर्षों में इस जमाधन में लगातार गिरावट आ रही थी। लेकिन कोरोना की महामारी वाले काल में भी इस धन में भारी बढ़ोतरी हुई। इस मामले पर हुई रिपोर्टिंग में इसे भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा किया गया यह अब तक का सबसे ज्यादा पैसा बताया गया है।



 

कांग्रेस ने पूछा सवाल

आर्थिक मामलों के जानकारी कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने अमर उजाला से कहा कि हम उस धन को कालाधन कह ही नहीं रहे हैं। हमारा सवाल तो केवल इतना है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जिस दौरान देश के 97 फीसदी लोगों के जमाधन में कमी हुई है, उनकी बचत में कमी आई है, लोग भोजन तक जैसी जरूरत को पूरा करने के लिए भी अपना पीएफ और जमापूंजी खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं, ऐसे समय में वे तीन फीसदी लोग कौन हैं जिनके धन में इस महामारी काल में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। सरकार को इन लोगों के नामों का खुलासा करना चाहिए।

प्रोफेसर गौरव बल्लभ ने कहा कि 2014 के पहले यही भाजपा कहती थी कि अकेले स्विस बैंकों में देश का 17.5 लाख करोड़ रुपये जमा है। वह इसे कालाधन कहकर इसे वापस लाने की बात करती थी। अब उसे बताना चाहिए कि सात साल के शासन के बाद इन बैंकों से सरकार कितना धन वापस लाई है। इसे भारतीयों में आर्थिक आधार पर लगातार बढ़ती असमानता के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें अमीर व्यक्ति और अधिक अमीर होता जा रहा है तो गरीब व्यक्ति और अधिक गरीब होता जा रहा है।
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