मीडिया में ये हुई रिपोर्टिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के द्वारा जमा धन में भारी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2019 के अंत में स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा धन 6625 करोड़ था जो 2020 के अंत में बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये हो चुका है। जबकि इसके पहले के दो वर्षों में इस जमाधन में लगातार गिरावट आ रही थी। लेकिन कोरोना की महामारी वाले काल में भी इस धन में भारी बढ़ोतरी हुई। इस मामले पर हुई रिपोर्टिंग में इसे भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा किया गया यह अब तक का सबसे ज्यादा पैसा बताया गया है।
कांग्रेस ने पूछा सवाल
आर्थिक मामलों के जानकारी कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने अमर उजाला से कहा कि हम उस धन को कालाधन कह ही नहीं रहे हैं। हमारा सवाल तो केवल इतना है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जिस दौरान देश के 97 फीसदी लोगों के जमाधन में कमी हुई है, उनकी बचत में कमी आई है, लोग भोजन तक जैसी जरूरत को पूरा करने के लिए भी अपना पीएफ और जमापूंजी खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं, ऐसे समय में वे तीन फीसदी लोग कौन हैं जिनके धन में इस महामारी काल में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। सरकार को इन लोगों के नामों का खुलासा करना चाहिए।
प्रोफेसर गौरव बल्लभ ने कहा कि 2014 के पहले यही भाजपा कहती थी कि अकेले स्विस बैंकों में देश का 17.5 लाख करोड़ रुपये जमा है। वह इसे कालाधन कहकर इसे वापस लाने की बात करती थी। अब उसे बताना चाहिए कि सात साल के शासन के बाद इन बैंकों से सरकार कितना धन वापस लाई है। इसे भारतीयों में आर्थिक आधार पर लगातार बढ़ती असमानता के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें अमीर व्यक्ति और अधिक अमीर होता जा रहा है तो गरीब व्यक्ति और अधिक गरीब होता जा रहा है।