केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारी मानते हैं कि छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए लाई गई कंपोजिशन स्कीम का दुरुपयोग हो रहा है। इस समय देशभर में करीब 19 लाख डीलरों ने कंपोजिशन स्कीम का चयन कर रखा है, जबकि इनसे हर तिमाही महज 500-600 करोड़ रुपये का ही राजस्व आ रहा है।
उल्लेखनीय है कि साल में 1.5 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले कारोबारी ही इसके तहत आते हैं। लेकिन कुछ मामलों में देखा गया कि व्यापारी साल में कारोबार तो काफी ज्यादा का कर रहे हैं, लेकिन दिखाते कम हैं।
इसलिए उन्हें महज एक फीसदी का ही जीएसटी चुकाना होता है। ऐसे मामलों में दूसरे कारोबारियों द्वारा दाखिल रिटर्न के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया जाएगा, जिनके साथ ये कंपोजिशन डीलर व्यापार करते हैं।
कोई कारोबारी जीएसटी वसूल रहा है लेकिन वह इस कर की वसूली कर सकता है या नहीं, इसे जानना आसान हो गया है। भारतीय राजस्व सेवा के एक युवा अधिकारी ने जीएसटी वेरीफाई नाम का एक ऐप बनाया है, जिस पर कारोबारी का जीएसटी नंबर डाल कर उसके बारे में सारी जानकारी ली जा सकती है।
जीएसटी के हैदराबाद कमिश्नरेट में तैनात संयुक्त आयुक्त बी रघु किरण एवं उनकी टीम द्वारा विकसित इस ऐप को बीते एक जुलाई को ही लाइव किया गया है। किरण का कहना है कि इस पर जीएसटी नंबर डालने से पता चल जाएगा कि कारोबारी जीएसटी नेटवर्क में पंजीकृत है या नहीं। यदि पंजीकृत है तो वह कर वसूल सकता है या नहीं, सब जानकारी मिल जाएगी।