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TCS Layoffs: छंटनी के एलान के बाद टीसीएस के शेयर दो फीसदी तक टूटे, कंपनी 12000 कर्मचारियों को बाहर कर रही

Mon, 28 Jul 2025 11:20 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

TCS Layoffs: टीसीएस ने कहा है कि कंपनी में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। इसके एक हिस्से के रूप में, हम संगठन से उन सहयोगियों को भी मुक्त करेंगे जिनकी तैनाती संभव नहीं हो सकती है। कंपनी के इस बयान के बाद सोमवार को शेयर बाजार खुलने के बाद उसके शेयरों में दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
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टीसीएस - फोटो : Agency
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विस्तार
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टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयरों में सोमवार को करीब दो प्रतिशत की गिरावट आई। कंपनी ने बताया है कि वह इस साल अपने वैश्विक कार्यबल में से करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी। बीएसई पर शेयर 1.69 प्रतिशत गिरकर 3,081.20 रुपये पर आ गया। एनएसई में यह 1.7 प्रतिशत गिरकर 3,081.60 रुपये पर आ गया। भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस इस वर्ष अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग 2 प्रतिशत या 12,261 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है, जिनमें से अधिकांश मध्यम और वरिष्ठ ग्रेड के होंगे।

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30 जून, 2025 तक, टीसीएस के कर्मचारियों की संख्या 6,13,069 थी। हाल ही में समाप्त जून तिमाही में इसने अपने कर्मचारियों की संख्या में 5,000 की वृद्धि की। टीसीएस ने एक बयान में कहा कि यह कदम कंपनी की "भविष्य के लिए तैयार संगठन" बनने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो प्रौद्योगिकी, एआई तैनाती, बाजार विस्तार और कार्यबल पुनर्गठन में निवेश पर केंद्रित है।

टीसीएस कहा है कि कंपनी में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। इसके एक हिस्से के रूप में, हम संगठन से उन सहयोगियों को भी मुक्त करेंगे जिनकी तैनाती संभव नहीं हो सकती है। इसका प्रभाव हमारे वैश्विक कार्यबल के लगभग 2 प्रतिशत पर पड़ेगा। इस कवायद से वर्ष के दौरान मुख्यतः मध्य और वरिष्ठ ग्रेड में तैनात कर्मचारी प्रभावित होंगे। टीसीएस प्रभावित कर्मचारियों को उचित लाभ, आउटप्लेसमेंट, परामर्श और सहायता प्रदान करेगी।
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यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत की शीर्ष आईटी सेवा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में एकल अंक में राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जो जून तिमाही के कुछ हद तक निराशाजनक रहने के बाद आई है, क्योंकि व्यापक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक तकनीकी मांग पर दबाव पड़ा और ग्राहकों के निर्णय लेने में देरी हुई।

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