देश का कुल कर संग्रह 2021-22 में 34 फीसदी बढ़कर 27.07 लाख करोड़ रहा। यह आंकड़ा बजट में लगाए गए 22.17 लाख करोड़ के अनुमान की तुलना में 5 लाख करोड़ ज्यादा है। यह पैसा आय, कॉरपोरेट टैक्स, सीमा शुल्क व जीएसटी के जरिये मिला है। यह 1999 के बाद 23 वर्षों में जीडीपी के अनुपात में सबसे ज्यादा संग्रह है।
राजस्व सचिव तरुण बजाज ने बताया कि जीडीपी के अनुपात में कर संग्रह 11.7 फीसदी रहा है। 2020-21 में यह 10.3% था। इस दौरान सरकार को कर से 20.27 लाख करोड़ की कमाई हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तवर्ष में प्रत्यक्ष कर 49% बढ़कर 14.10 लाख करोड़, कॉरपोरेट टैक्स 56.1% बढ़कर 8.58 लाख करोड़ और व्यक्तिगत कर 43% बढ़कर 7.49 लाख करोड़ रुपये रहा।
प्रत्यक्ष कर में भी 49 फीसदी का इजाफा
अप्रत्यक्ष कर संग्रह 20% बढ़कर 12.90 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें सीमा शुल्क की हिस्सेदारी 48% बढ़कर 1.99 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि केंद्रीय जीएसटी की हिस्सा 30% बढ़कर 6.95 लाख करोड़ रुपये रहा। हालांकि, आयात शुल्क मामूली घटकर 3.9 लाख करोड़ रुपये रहा। इस दौरान 2.43 लाख करदाताओं को 2.24 लाख करोड़ रुपये रिफंड किए गए।
विदेशी मुद्रा भंडार में सप्ताह की बड़ी गिरावट
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट आई है। वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की वजह से मुद्रा के दबाव में आने के कारण विदेशी मुद्रा भंडार 11.17 अरब डॉलर घटकर 606.475 अरब डॉलर पर आ गया। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पिछले सप्ताह के दौरान यह भंडार 2.03 अरब डॉलर घटकर 617.648 अरब डॉलर रह गया था।