जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क, बोर्ड (सीबीआईसी) के 'कर सहायक' अपने विभाग की पदोन्नति पॉलिसी को लेकर खासे नाराज हैं। इन कर्मियों को दस साल में पहली पदोन्नति भी नहीं मिल सकी है, जबकि इनके समकक्ष केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में टैक्स असिटेंट को तीन वर्ष में पहली परमोशन मिल रही है। उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति के पांच अवसर मिल रहे हैं। खास बात है कि दोनों विभागों की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है। 'ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन' का कहना है कि अब 'सीबीआईसी' ने अपनी मनमर्जी से 'भर्ती नियम' तय कर, टैक्स असिस्टेंट को पदोन्नति के मोर्चे पर बड़ा झटका दे दिया है। 'कर सहायक' को पहली परमोशन 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' के पद पर मिलती है। अब नए भर्ती नियमों में 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' के पद पर सीधी भर्ती की जाएगी। नतीजा, कर सहायक, पदोन्नति से चूक जाएंगे। एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि सीबीआईसी द्वारा डीओपीटी के नियमों का उल्लंघन करना अब सामान्य बात हो गई है।
ऐसे तो 'कर सहायक' की पहली पदोन्नति भी खत्म हो जाएगी
एसोसिएशन के महासचिव चित्रसेन गर्ग व संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी बताते हैं, सीबीआईसी में कर्मियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। पदोन्नति को लेकर टैक्स असिस्टेंट की कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। पहली परमोशन के बाद एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट का पद मिलता था, अब उसे भी सीधी भर्ती के दायरे में ले लिया गया है। इतना ही नहीं, पहले जो परमोशन दो-तीन वर्ष में मिलती थी, उसका समय बढ़ाकर दस वर्ष कर दिया है। एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट ग्रेड में लगभग 3500 रिक्तियां हैं। अगर इन्हें डायरेक्ट रिक्रूमेंट से भरा जाता है तो 'कर सहायक' की पहली पदोन्नति भी खत्म हो जाएगी। एसोसिएशन का कहना है कि विभाग ने अपनी मनमर्जी से भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया है। सीधी भर्ती से 40 फीसदी पद और पदोन्नति के कोटे से 60 प्रतिशत पद भरे जाते हैं। एसोसिएशन की मांग है कि मौजूदा परिस्थितियों में पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों का प्रतिशत सौ कर दिया जाए। अगर ये नहीं होता है तो टैक्स असिस्टेंट के साथ अन्याय होगा।
एसएससी ने इस शर्त को पूरा करने में जताई असमर्थता
नए भर्ती नियमों के अंतर्गत डायरेक्ट रिक्रूटमेंट में टाइपिंग स्पीड ज्यादा रखी गई थी। एसएससी ने इस शर्त को पूरा करने में असमर्थता जता दी। डीओपीटी की नीति है कि सक्सेसिव लेवल पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। वजह, इससे परमोशन लेकर वहां तक पहुंचने वालों के साथ अन्याय होगा। विभाग ने प्रोटेक्शन क्लॉज की बात भी नहीं मानी। पिछली बार प्रिसिंपल आरआर 2015 में आए थे। अब उन्हीं में संसोधन कर दिया गया है। ये संसोधन ऐसे हैं कि उसमें सीधी भर्ती, जो 40 फीसदी है, तकनीकी तौर पर वह भी पूरी नहीं हो सकी। एसोसिएशन की मांग है कि उसे सौ फीसदी, पदोन्नति के दायरे में शामिल कर दिया जाए। डीओपीटी की नीति है कि जब कभी 'आरआर' बदलें तो संबंधित पक्ष यानी स्टेक होल्डर से पूछना होता है। यहां पर विभाग ने पूछा था। एसोसिएशन की ओर से सीबीआईसी को सुझाव भी दिए गए थे, लेकिन उन सुझावों को माना नहीं गया। संसोधन में जो बातें शामिल की गई, वे ड्रॉफ्ट का हिस्सा नहीं थी। कर्मियों के सुझावों को दरकिनार कर दिया गया। हैरानी की बात तो ये है कि व्यय विभाग द्वारा पदों को रिवाइव करने से पहले 'भर्ती नियम' छप गए। सीबीआईसी बोर्ड में डेटा तक कंपाइल नहीं हो पा रहा है। दो माह बीत चुके हैं, मगर फाइल अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। दो दर्जन से अधिक कैडर कंट्रोल अथॉरिटी से डेटा मांगा गया है।
अभी तक लटकी है 'एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट' की पदोन्नति
'कर सहायक' के पद पर काम कर रहे कार्मिकों की पदोन्नति की अभी तक लटकी है। लगभग 3500 'टैक्स असिस्टेंट' को उम्मीद थी कि वे बहुत जल्द 'एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट' बन जाएंगे। इसके लिए 'वन टाइम रिलेक्सेशन' का आदेश जारी होना था। सीबीआईसी बोर्ड द्वारा तमाम औपचारिकताएं पूरी कर यह फाइल यूपीएससी को भेजी जाएगी। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही 'टैक्स असिस्टेंट' के पद पर कार्यरत कार्मिकों के पदोन्नति आदेश जारी हो सकेंगे। वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग, पहले ही इस प्रपोजल को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है। संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी का कहना है कि गत नवंबर में पदोन्नति का प्रपोजल, डीओपीटी को भेजा गया था। कभी तो उस फाइल पर कोई आब्जेशन लग जाता तो कभी कोई दूसरी कमी निकाल दी जाती। डीओपीटी ने मई में इसे अपनी मंजूरी दी है। कायदे से अब तक पदोन्नति आदेश जारी हो जाने थे, लेकिन दोबारा से कुछ तकनीकी खामियां बताकर मामला लटका दिया गया। व्यय विभाग का कहना था कि दो साल से सीबीआईसी में जो पद खाली पड़े हैं, उन्हें रिवाइव करा लें। ऐसा न हो कि वे पद कहीं खत्म हो गए हों।
पहली पदोन्नति में ही लगेगा एक दशक
सीबीआईसी में टैक्स असिस्टेंट को पहले तीन साल में परमोशन मिलती थी, अब 10 साल लग रहे हैं। मौजूदा नियमों के अंतर्गत टैक्स असिस्टेंट को अगर इंस्पेक्टर के पद पर पहुंचना है तो उसे दो तीन दशक का इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में मुश्किल से दो या तीन परमोशन ही मिल सकेंगे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में टैक्स असिटेंट को तीन वर्ष में पहली परमोशन मिल रही है। उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति के पांच अवसर मिल रहे हैं, जबकि दोनों विभागों की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है। एसोसिएशन ने मेरिट बेस्ड परमोशन का प्रपोजल, डीओपीटी को भेजा था। राजस्व सचिव ने भी उसे अपनी मंजूरी दे दी थी। डीओपीटी से फाइल क्लीयर होती है तो परमोशन में लगने वाला दस साल का समय, घटकर पांच वर्ष हो जाएगा।
इन दो विभागों में भर्ती प्रक्रिया व योग्यता है एक समान
एसएससी की सीजीएल की परीक्षा पास करने के बाद वित्त विभाग के अंतर्गत केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क 'सीबीआईसी' और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड 'सीबीडीटी' में टैक्स असिसेंट के पद पर नियुक्ति होती है। सीबीआईसी और सीबीडीटी में इस पद के लिए एक समान योग्यता रखी गई है। भर्ती एजेंसी और परीक्षा का स्वरुप भी एक ही है, लेकिन बात जब परमोशन की आती है तो 'सीबीआईसी' के टैक्स असिसेंट, 'सीबीडीटी' के मुकाबले पिछड़ जाते हैं। यहां पर टैक्स असिस्टेंट के पद पर नियुक्त हुआ व्यक्ति तीन साल में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनता है। उसके बाद इंस्पेक्टर बनने का नंबर आता है। दोनों ही विभागों में टैक्स असिस्टेंट के पदों पर चयन, एक परीक्षा और मानकों के तहत होता है। दोनों का काम भी एक ही जैसा होता है। प्रमोशन की बात आती है तो नियम अलग-अलग हो जाते हैं। यहीं से कार्मिकों के बीच भेदभाव की भावना पैदा हो जाती है। सीबीआईसी में तो अब दस साल में पहली परमोशन मिलती है। ऐसे में टैक्स असिटेंट के लिए सहायक आयुक्त, अधीक्षक या उपायुक्त के पद तक पहुंचने की संभावना लगभग खत्म सी हो चली है।
सात वर्ष पहले शुरु हुई थी पदोन्नति की यह दिक्कत
साल 2015 में सीबीआईसी ने सीनियर टैक्स असिस्टेंट का पद नाम बदलकर उसे 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' कर दिया था। इस पद तक पहुंचने के लिए कर्मचारी को 10 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। दूसरी तरफ, सीबीडीटी' में टैक्स असिस्टेंट को 3 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही सीनियर टैक्स असिस्टेंट की प्रमोशन मिल जाती है। इतना ही नहीं, सीबीडीटी में सीनियर टैक्स असिस्टेंट दो साल बाद इंस्पेक्टर बन जाते हैं। सीबीआईसी में कार्यरत टैक्स असिटेंट को 10 साल में केवल एक प्रमोशन मिल रहा है। दोनों विभागों में टैक्स असिटेंट की भर्ती प्रक्रिया से लेकर उनके काम करने का तरीका एक जैसा है तो फिर पदोन्नति को लेकर यह भेदभाव क्यों। 2015 से पहले दोनों ही विभागों में प्रमोशन के नियम एक जैसे थे, लेकिन सीबीआईसी ने प्रमोशन के नियम में बदलाव कर कार्मिकों के बीच भेदभाव पैदा कर दिया है। सीबीआईसी ने 2016 में फिर से बिना स्टेकहोल्डर्स के कमेन्ट लिए इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन के लिए कार्यकाल की अवधि को बढ़ाकर 2 साल से 5 साल कर दिया। यानी सीबीआईसी में काम कर रहे एक टैक्स असिस्टेंट को 15 साल में 2 प्रमोशन मिल रहे हैं। सीबीडीटी में काम कर रहे टैक्स असिस्टेंट को 5 साल में 2 प्रमोशन दिए जाते हैं। जब सीबीआईसी के लिए नए नियम बनाए जा रहे थे तो उनमें 'प्रोटेक्शन क्लॉज' का प्रावधान भी नहीं किया गया।