एफआईएसई की टीम के एक सदस्य ने अमर उजाला को बताया कि इस मशीन से एमआरआई स्कैनिंग की लागत आधी रह जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस समय 1.5 टेस्ला होल बॉडी एमआरआई के लिए मरीजों को आठ से 10,000 रुपये चुकाने पड़ते हैं। मतलब, इसके बाजार में आ जाने पर चार-पांच हजार रुपये या इससे भी कम खर्च में यह जांच संभव हो सकेगा।
मौजूदा स्कैनर्स हैं महंगे
इस समय 1.5 टी क्षमता वाले स्कैनर्स विदेशों से मंगाये जाते हैं और इसकी कीमत डेढ़ से तीन लाख अमेरिकी डॉलर पड़ती है। हालांकि टाटा ट्रस्ट ने इसकी कीमत अभी तय नहीं की है लेकिन उनका कहना है कि आयातित मशीनों के मुकाबले यह काफी सस्ती होगी। इसके अलावा आयातित मशीनें बेहद भारी होती हैं जबकि देश में ही विकसित मशीन इसके मुकाबले बेहद हल्की हैं।
पहला परीक्षण श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट में
इस मशीन को विकसित करने में बंगलूरू के श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ हायर मेडिकल साइंसेज ने क्लिनिकल पार्टनर की भूमिका निभाई है। इस मशीन को सबसे पहले वहीं लगाया गया था।