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टाटा संस: बोर्डरूम विवाद के बीच टाटा केमिकल्स 11 फीसदी लुढ़का, जानें क्यों टूट रहे शेयर

Fri, 18 Sep 2026 07:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाटा समूह के शेयरों में शुक्रवार को भारी गिरावट आई, जिसमें टाटा केमिकल्स 11 फीसदी से अधिक लुढ़का। यह गिरावट टाटा संस में कार्यकारी अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर चल रहे बोर्डरूम विवाद के कारण हुई।
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टाटा संस - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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टाटा समूह के प्रमुख शेयरों में शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई। पिछले सत्र की तेजी के बाद इनमें यह गिरावट आई है। यह गिरावट टाटा संस में चल रहे बोर्डरूम विवाद के कारण हुई है।

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टाटा केमिकल्स के शेयर 11.14 फीसदी गिर गए। टाटा टेक्नोलॉजीज 4.65 फीसदी, टीसीएस 4.33 फीसदी और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 3.45 फीसदी नीचे आए। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन 2.32 फीसदी और टाइटन 2.11 फीसदी गिरे। टाटा स्टील 1.73 फीसदी, टाटा एलक्सी 1.33 फीसदी और टाटा कम्युनिकेशंस 1.10 फीसदी लुढ़के। ट्रेंट 0.64 फीसदी और वोल्टास 0.50 फीसदी नीचे बंद हुए। 

इन कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्यांकन 58,000 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। टीसीएस 30 सेंसेक्स कंपनियों में सबसे बड़ी गिरावट वाला शेयर रहा। गुरुवार को टाटा समूह के शेयर तेजी के साथ बंद हुए थे, जिसमें टाटा केमिकल्स करीब 7 फीसदी चढ़ा था।

क्या है बोर्डरूम विवाद का कारण?

टाटा संस के निदेशक मंडल ने कार्यकारी अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दी। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव को अमान्य घोषित कर दिया। इससे समूह के भविष्य को लेकर एक बड़ा विवाद फिर से शुरू हो गया है। यह विवाद साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद से सबसे गंभीर बोर्डरूम संकट है।

चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर क्यों उठा सवाल?

चंद्रशेखरन ने पिछले महीने बोर्ड को बताया था कि वह 20 फरवरी, 2027 को अपना वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने पर अगला कार्यकाल नहीं चाहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस के कोर निवेश कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण रद्द करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद बोर्ड ने अपना रुख बदला और चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।

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बोर्ड ने बहुमत से उन्हें फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने इसके खिलाफ मतदान किया। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस का करीब 66 फीसदी नियंत्रण है और उसने इस फैसले को खारिज कर दिया।

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