फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

त्योहारी सीजन से पहले सरकार का बड़ा फैसला: थोक चीनी स्टॉक सीमा दोगुनी, जानें क्या होगा असर

Fri, 18 Sep 2026 05:56 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा 15 से बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। यह कदम औद्योगिक आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और कीमतों को स्थिर रखेगा।
विज्ञापन
चीनी का स्टॉक - फोटो : amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सरकार ने थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया है। यह फैसला त्योहारी सीजन से पहले लिया गया है, जब चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। इस कदम का उद्देश्य औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को त्योहारी महीनों के दौरान अधिक लचीलापन प्रदान करना है।

विज्ञापन


यह निर्णय प्रमुख थोक उपभोक्ताओं के साथ विस्तृत परामर्श के बाद लिया गया। उन्होंने त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी हुई स्टॉक सीमा की मांग की थी। सरकार का यह कदम थोक उपभोक्ताओं के हितों और घरेलू चीनी बाजार की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए है। बढ़ी हुई सीमा के तहत, 15 दिन से अधिक का कोई भी स्टॉक केवल टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) या अग्रिम प्राधिकरण योजना (एएएस) के तहत आयातित चीनी से ही आना चाहिए।

सरकार ने यह भी बताया कि एक्स-मिल चीनी कीमतों में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, खुदरा कीमतों में केवल करीब 10 फीसदी की कमी आई है, जिससे उपभोक्ताओं को पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार ने थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं से कम एक्स-मिल कीमतों का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का आग्रह किया है। किसानों को भी 1 अक्तूबर, 2026 से 365 रुपये प्रति क्विंटल का उच्च उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) प्राप्त होगा।

क्या है नई स्टॉक सीमा और इसके नियम?

वर्तमान में, जो थोक उपभोक्ता हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं, उन्हें अपनी आवश्यकता के 15 दिनों तक का स्टॉक रखने की अनुमति थी। अब यह सीमा दोगुनी होकर 30 दिन हो गई है। सरकार ने पहले ही टीआरक्यू के तहत 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दे दी है। एएएस के तहत प्राप्त निर्यात-बाध्य चीनी की घरेलू बिक्री की भी अनुमति है। खुले बाजार से प्राप्त चीनी पर 15 दिन की खपत की सीमा बनी रहेगी। थोक उपभोक्ताओं को हर शुक्रवार को खाद्य मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल foodstock.dfpd.gov.in के माध्यम से अपने चीनी स्टॉक की घोषणा करनी होगी।

उपभोक्ताओं को क्यों नहीं मिल रहा सस्ती चीनी का लाभ?

केंद्र सरकार ने बताया कि एक्स-मिल चीनी कीमतों में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, खुदरा कीमतों में अगस्त के उच्चतम स्तर 65 रुपये से वर्तमान 58.50 रुपये तक केवल करीब 10 फीसदी की कमी आई है। यह दर्शाता है कि सस्ती थोक दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) और अन्य चीनी व्यापार निकायों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त बैठक में यह बात कही। सरकार ने थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और व्यापक व्यापार से आग्रह किया कि वे कम एक्स-मिल कीमतों का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं। चीनी मूल्य श्रृंखला से त्योहारी सीजन में चीनी और चीनी-आधारित उत्पादों को किफायती रखने का आह्वान किया गया।

किसानों और उपभोक्ताओं के लिए सरकार की क्या है नीति?

सचिव ने कहा कि किसान और उपभोक्ता भारत की चीनी नीति के दो मुख्य स्तंभ बने हुए हैं। सरकार ने गन्ना उत्पादकों के लिए लाभकारी प्रतिफल और उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमतों को संतुलित करने का काम किया है। 1 अक्तूबर, 2026 से शुरू होने वाले नए चीनी सीजन के साथ, किसानों को 365 रुपये प्रति क्विंटल का उच्च उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) प्राप्त होगा। यह सरकार द्वारा सालाना एफआरपी बढ़ाने की प्रथा का हिस्सा है। मंत्रालय चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर बारीकी से निगरानी करेगा। आवश्यकतानुसार आगे के उपाय भी करेगा ताकि उपभोक्ताओं और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योगों दोनों के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें