मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों को आर्थिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा टैरिफ प्रकरण, हाल के दिनों में तेल की कम कीमतों और वित्तीय सहायता में कटौती के कारण क्षेत्र में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने के कारण है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बुधवार को यह टिप्पणी की।
आईएमएफ में मध्य पूर्व और मध्य एशिया के निदेशक जिहाद अजौर ने कहा कि अमेरिका और अन्य देशों की टैरिफ योजनाओं और भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनकी वृद्धि में 2 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
अजौर ने इस वर्ष एमईएनए क्षेत्र में वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है। पिछले वर्ष यह 1.8 प्रतिशत थी। अजौर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता से परिदृश्य प्रभावित हो सकता है। फारस की खाड़ी की अर्थव्यवस्थाएं पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना जारी रखे हुए हैं। यह महामारी के बाद से सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 2 प्रतिशत तक बढ़ गया है। आईएमएफ का कहना है कि वह संघर्षरत कुछ देशों और सीरिया की नई सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि आईएमएफ के कर्मचारी और लेबनानी अधिकारी लेबनान में चर्चा कर रहे हैं।
अजूर ने कहा, "सीरिया में स्थिति सामान्य होना एक लंबी प्रक्रिया होगी। इसके लिए क्षेत्रीय और अंतराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की आवश्यकता होगी। वहां संस्थानों के निर्माण, उनकी अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए एक व्यापक कार्यक्रम की आवश्यकता होगी।" रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद संरचनात्मक सुधारों और आर्थिक संबंधों में विविधता लाकर विकास को गति दिया जा सकता है।