अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही दोनों देशों के बीच व्यापार के क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ट्रंप प्रशासन ने चीनी सामान के आयात पर 145 फीसदी का टैरिफ लगाया है, इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर 125 फीसदी का टैक्स लगाया है। अब दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने स्विटजरलैंड के शहर जेनेवा में बातचीत की।
टैरिफ युद्ध के बीच अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते पर चल रही वार्ता पूरी हो गई है। अमेरिका ने कहा कि चीन के साथ व्यापार समझौते को लेकर दो दिन तक चली वार्ता पूरी हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि समझौते का ब्योरा सोमवार को दिया जाएगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति आवास सह कार्यालय व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका ने जेनेवा में चीन के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की है, लेकिन उसने समझौते के बारे में कोई विवरण नहीं दिया। वहीं, स्विटजरलैंड के शहर जेनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच शनिवार और रविवार को बातचीत हुई।
इसके बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमने बहुत महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता में पर्याप्त प्रगति की है। हम इसके बारे में पूरा विवरण सोमवार को देंगे।
वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि शायद अंतर उतना बड़ा नहीं था जितना सोचा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि चीनी अधिकारी कठोर वार्ताकार थे। व्यापार वार्ता में अमेरिका की तरफ से बेसेंट और ग्रीर शामिल हुए, जबकि चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही दोनों देशों के बीच व्यापार के क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ट्रंप प्रशासन ने चीनी सामान के आयात पर 145 फीसदी का टैरिफ लगाया है, इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर 125 फीसदी का टैक्स लगाया है और अमेरिका को कुछ महत्वपूर्ण सामग्रियों के निर्यात पर भी पाबंदी लगा दी है।
विवाद बढ़ा तो टैरिफ कम करने पर ट्रंप सहमत
बीते शुक्रवार को ट्रंप ने इशारा दिया था कि अमेरिका चीन पर लगे टैरिफ में कमी कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा कि 80% टैक्स सही रहेगा। मामले में विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब हे लिफेंग और स्कॉट बेसेंट आमने-सामने बातचीत की। वॉशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर की विशेषज्ञ सुन युन ने कहा कि इस बैठक से किसी बड़ी उपलब्धि की उम्मीद नहीं है, लेकिन अगर दोनों देश टैरिफ में थोड़ी भी नरमी दिखाते हैं, तो यह एक सकारात्मक संकेत होगा।