स्वीडन ने दुनिया के टेलिकॉम सेक्टर में दबदबा कायम करने की कोशिश में जुटे चीन को तगड़ा झटका दिया है। स्वीडन ने चीन को आर्थिक चोट पहुंचाते हुए साफ कर दिया है कि 5जी नेटवर्क तैयार करने के लिए वो चीनी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट नहीं देगा। इस दौड़ में सबसे आगे चीनी कंपनी Huwaei थी। दरअसल अमेरिका ने ब्राजील व यूरोपीय देशों से कहा था कि वे चीन को किसी भी कीमत पर 5जी नेटवर्क का कॉन्ट्रैक्ट न दें।
इन देशों को भी कॉन्ट्रैक्ट देने से किया इनकार
स्वीडन के पास सभी जरूरी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, इसलिए वो अब 5जी नेटवर्क खुद तैयार करेगा। मालूम हो कि इससे पहले स्वीडन ब्रिटेन, कनाडा और ब्राजील को भी कॉन्ट्रैक्ट देने से इनकार कर चुका है। अनुमान है कि भविष्य में यूरोप के बाकी देश भी इस ट्रेंड को फॉलो कर सकते हैं।
स्वीडन में चीन के राजदूत गुई गोंग्यू ने कहा कि चीन की कंपनियों से इस तरह का भेदभाव हमें कबूल नहीं है और उन्हें इस मामले में फिर विचार करना चाहिए। मामले पर स्वीडन सरकार ने Huwaei पर बैन का निर्णय पहले ही कर लिया था और इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका भी दायर की थी। कोर्ट ने बैन के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस बीच चीन ने स्वीडन को मानाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका।
गौरतलब है कि स्वीडन ने यह फैसला लोगों की राय लेने के बाद लिया। 5जी नेटवर्क के कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित एक सर्वे में सामने आया था कि 82 फीसदी स्वीडिश नागरिकों का मानना है कि चीन में लोकतंत्र नहीं है और वहां मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामले सामने आते हैं। इसलिए उन्हें यह कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जाना चाहिए।