प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 में संगम के तट पर श्रद्धालुओं को इस बार 52 फुट ऊंचा, 52 फुट लंबा और 52 फुट चौड़ा महामृत्युंजय यंत्र देखने को मिलेगा। स्वामी सहजानंद सरस्वती की ओर से स्थापित किया जाने वाला यह यंत्र मानसिक शांति और सकारात्मकता का प्रतीक होगा और पर्यावरण शुद्धिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। स्वामी जी ने मानसिक प्रदूषण को दूर करने के लिए महामृत्युंजय यंत्र को बनाया है। उनका मानना है कि मानसिक शांति और सकारात्मकता पर्यावरण संरक्षण के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। यह यंत्र एक तरह से मानसिक सकारात्मकता फैलाने का कार्य करता है, जिससे व्यक्ति प्रकृति के साथ जुड़ाव महसूस करता है।
स्वामी सहजानंद सरस्वती महाराज, जो अपनी जीवनभर की पर्यावरण संरक्षण की निष्ठा के लिए प्रसिद्ध हैं, न केवल प्रकृति संरक्षण के प्रवक्ता हैं बल्कि एक ऐसे आध्यात्मिक नेता भी हैं जो मानवता और पर्यावरण के संबंध को गहरे से समझते हैं। स्वामी जी "आंदोलन" की बजाय "विचार परिवर्तन" की बात करते हैं, उनका मानना है कि जब व्यक्ति पर्यावरण की महत्ता को सही ढंग से समझेगा, तो सब कुछ स्वाभाविक रूप से ठीक हो जाएगा।
मिशन ग्रीन और महामृत्युंजय यंत्र
स्वामी जी के नेतृत्व में मिशन ग्रीन पहल ने पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस फाउंडेशन ने प्लास्टिक उपयोग को कम करने के लिए लाखों कपड़े के थैले वितरित किए हैं, 65 लाख से अधिक पेड़ लगाए हैं और प्लास्टिक-मुक्त भारत की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। स्वामी जी ने वर्ल्ड क्लाइमेट चेंज फाउंडेशन की स्थापना भी की है, जो उनके मानवता और प्रकृति के बीच सामंजस्य बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
स्वामी जी का एक प्रमुख विचार कार्बन क्रेडिट है। वे यह मानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति या संस्थान पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है, तो उसे उसी मात्रा में पेड़ लगाकर या पहले से लगे हुए पेड़ों की देखभाल करके प्रदूषण को संतुलित करना चाहिए। वे कहते हैं कि जब व्यक्ति अपनी कार्बन और जल पदचिह्न को समझेगा, तभी वह पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकेगा।
वैश्विक पर्यावरण जागरूकता
स्वामी सहजानंद जी की पहल केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने दुनियाभर में पर्यावरण जागरूकता फैलाने के लिए कई अभियान चलाए हैं। एक उल्लेखनीय उदाहरण है मेरी शान मेरा थैला अभियान, जिसमें 2025 कुम्भ मेला के दौरान 50,000 कपड़े के थैले वितरित किए गए, ताकि लोग प्लास्टिक के बदले पर्यावरण मित्र विकल्पों को अपनाएं। स्वामी जी के पर्यावरण अभियान हमेशा उनके आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जुड़े होते हैं, जिसमें उन्होंने यह संदेश दिया कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब लोग प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जिएं।
प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग
स्वामी जी प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग का जोर देते हैं, यह मानते हुए कि विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि देशों को अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए आर्थिक विकास की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। वे चेतावनी देते हैं कि जिस तेज़ी से आजकल पर्यावरण का दोहन हो रहा है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा संकट बन सकता है। स्वामी जी का संदेश है कि हम अपने पूर्वजों की तरह पृथ्वी की रक्षा करें और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।