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Economy: बाय नाऊ पे लेटर स्कीम और क्रेडिट कार्ड से खर्च युवाओं का बचत घटा रहा, बोले RBI के डिप्टी गवर्नर

Tue, 17 Dec 2024 11:06 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Reserve Bank: मालदीव के माले में मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (एमएमए) अनुसंधान सम्मेलन में बोलते हुए, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे नई वित्तीय प्रौद्योगिकियां उपभोक्ताओं के व्यवहार को बदल रही हैं और पारंपरिक आर्थिक नीतियों के असर को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने आगे क्या कहा, आइए जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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"अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें" (बाय नाऊ पे लेटर) जैसी योजनाएं और क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च तत्काल उपभोग को बढ़ावा देते हैं और युवा पीढ़ी की बचत कम करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा ने यह बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि ये रुझान तत्काल उपभोग को बढ़ावा देते हैं लेकिन बचत को कम करते हैं, जिससे मौद्रिक और नियामकीय नीति निर्माण के लिए नई चुनौतियां सामने आती हैं। 

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मालदीव के माले में मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (एमएमए) अनुसंधान सम्मेलन में बोलते हुए, पात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे ये नई वित्तीय प्रौद्योगिकियां उपभोक्ता व्यवहार को नया रूप दे रही हैं और पारंपरिक आर्थिक नीतियों के असर को प्रभावित कर रही हैं। 

उन्होंने कहा, "इस बात के सबूत हैं कि अभी खरीदें-बाद में भुगतान करें और क्रेडिट कार्ड-आधारित खर्च तत्काल उपभोग को बढ़ावा दे सकते हैं। खासकर युवा पीढ़ी के लिए और उनकी बचत को कम कर सकते हैं।" उन्होंने डिजिटल वित्तीय समाधानों को तेजी से अपनाने से उत्पन्न कई प्रमुख चुनौतियों की पहचान की। उनके अनुसार सबसे पहले, पारंपरिक बचत विधियों से दूर जाने से मौद्रिक नीति आवेगों का वास्तविक अर्थव्यवस्था में संचरण कमजोर हो सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए आर्थिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से विनियमित और स्थिर करना कठिन हो जाता है।
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दूसरी चुनौती के बारे में बताते हुए पात्रा ने घरेलू स्तर पर ऋण वृद्धि के जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऋण तक आसान पहुंच व्यक्तियों के लिए वित्तीय तनाव का कारण बन सकती है। उन्होंने डिजिटल वित्तीय साक्षरता के निम्न स्तर के कारण वित्तीय कुप्रबंधन की संभावना के बारे में भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे परिवारों को वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री हो सकती है। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, पात्रा ने सुझाव दिया कि केंद्रीय बैंकों और नीति निर्माताओं को अपना दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए।

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