आज सुप्रीम कोर्ट में दूरसंचार कंपनियों पर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाय को लेकर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दूरसंचार कंपनियों से एजीआर बकाया की वसूली के लिए तत्काल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। ये इसलिए अहम है क्योंकि एजीआर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश में दूरसंचार कंपनियों का भविष्य तय करेगा।
न्यायमूर्ति अरुण किमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अंशुल गुप्ता की याचिका कारिज की और कहा कि, 'हम पहले से ही इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। हम याचिका सुनने के पक्ष में नहीं हैं।'
दरअसल याचिकाकर्ताओं ने एजीआर की तत्काल रिकवरी के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी। एजीआर के तहत दूरसंचार कंपनियों के पास करीब 90 हजार करोड़ रुपये का बकाया है।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
14 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में उच्चतम न्यायालय की एक खंडपीठ ने यह जानना चाहा कि रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (आरजेआईएल) को रिलायंस कम्युनिकेशंस के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के बकाए का भुगतान क्यों नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह 2016 के बाद से स्पेक्ट्रम का उपयोग कर रहा है।
एक सूत्र ने मामले के न्यायालय में होने के कारण नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि आरजेआईएल ने अप्रैल 2016 में आरकॉम और उसकी इकाई रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के स्पेक्ट्रम के एक हिस्से को साझा करने के लिए एक समझौता किया था।
सूत्र ने बताया कि आरकॉम और आरटीएल का एजीआर बकाया इस स्पेक्ट्रम साझेदारी से किसी भी तरह जुड़ा नहीं है। उन्होंने साथ ही बताया कि साझा स्पेक्ट्रम से हुई आय पर आरकॉम/आरटीएल और आरजेआईएल दोनों ने एजीआर चुकाया है। उन्होंने बताया कि 2016 से पहले आरकॉम/आरटीएल के 2जी/3 जी कारोबार से संबंधित एजीआर बकाया का इस स्पेक्ट्रम साझेदारी से मतलब नहीं है, क्योंकि उस समय आरजेआईएल परिचालन में नहीं था