गौरतलब है टाटा संस, रतन टाटा और टाटा कंसल्टेंसी लिमिटेड (टीसीएस) ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने टाटा संस और साइरस मिस्त्री विवाद में 18 दिसंबर को दिए अपने फैसले में बदलाव के कंपनी निबंधक (आरओसी) के अनुरोध को खारिज कर दिया है। एनसीएलएटी ने कहा कि उसने अपने आदेश में आरओसी पर कोई आरोप नहीं लगाया था।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘18 दिसंबर के फैसले में संशोधन का कोई आधार नहीं है।’ इस मामले में एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री को टाटा समूह को फिर से चेयरमैन पद पर बहाल करने का आदेश दिया था और टाटा संस को आरओसी द्वारा पब्लिक से निजी कंपनी में तब्दील किए जाने को ‘अवैध’ करार दिया था।
टाटा संस, मानद चेयरमैन रतन टाटा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) ने एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले आरओसी ने अपनी दो याचिकाओं में उसे पक्षकार बनाने और अपने 172 पृष्ठों के फैसले में से ‘अवैध’ और ‘आरओसी की मदद से’ शब्दों को हटाने की मांग की थी।
न्यायाधिकरण ने अक्तूबर 2016 में मिस्त्री को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन हटाने के बाद एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को भी ‘अवैध’ करार दिया था। उसने आरओसी को भी टाटा संस के दर्जे को पलटकर ‘निजी कंपनी’ से ‘पब्लिक कंपनी’ में तब्दील करने के भी निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति रतन टाटा और नुसली वाडिया को मिल-बैठकर मानहानि विवाद को निपटाने के लिए कहा है। टाटा समूह की कुछ कंपनियों के बोर्ड से निकाले जाने के बाद वाडिया ने रतन टाटा सहित टाटा सन्स केकुछ निदेशकों के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दोनों उद्योगपतियों से कहा, ‘आप दोनों समझदार लोग हैं। आप दोनों उद्योग जगत के लीडर हैं। क्यों नहीं आप दोनों मिल-बैठकर इसका निपटारा कर लेते हैं।’
शुरुआत में पीठ इस मामले का निपटारा करने के पक्ष में थी लेकिन वाडिया के वकील ने कहा कि वह इस मामले में अपने मुवक्किल से निर्देश लेना चाहते हैं। इस पर पीठ ने सुनवाई 13 जनवरी तक के लिए टाल दी।