Relief: बसंत और पंकज बंसल को प्रवर्तन निदेशालय ने कथित रिश्वत मामले से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में पहले गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत ने 11 अगस्त को एक पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ी ईडी की जांच में आरोपी निदेशकों को जमानत पर रिहा करने से इनकार करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आरोपी निदेशकों की जमानत याचिका पर केंद्र और प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम स्थित रियल्टी समूह एम3एम के निदेशकों बसंत बंसल और पंकज बंसल को धन शोधन के एक मामले में मंगलवार को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने वकीलों की दलीलें सुनने के बाद 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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बंसल बंधुओं ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 20 जुलाई के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था जिसने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह मामला काफी गंभीर प्रकृति का है।
प्रवर्तन निदेशालय ने मांगा गया था जवाब
बसंत और पंकज बंसल को प्रवर्तन निदेशालय ने कथित रिश्वत मामले से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में पहले गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत ने 11 अगस्त को एक पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ी ईडी की जांच में आरोपी निदेशकों को जमानत पर रिहा करने से इनकार करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आरोपी निदेशकों की जमानत याचिका पर केंद्र और प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा था।
बसंत बंसल और पंकज बंसल को जिस धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया गया है, वह हरियाणा पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा अप्रैल में ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मामलों के पूर्व विशेष न्यायाधीश सुधीर परमार, उनके भतीजे और तीसरे एम3एम समूह निदेशक रूप कुमार बंसल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है।
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एसीबी का मामला दर्ज होने के बाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने परमार को निलंबित कर दिया था। ईडी ने कहा है कि उसने गिरफ्तारी करने से पहले प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों के संबंध में "बैंक स्टेटमेंट और मनी ट्रेल आदि जैसे आपत्तिजनक सबूत" एकत्र किए हैं।
बदला लेने जैसी कार्रवाई ना करे ईडीः कोर्ट
इस मामले में आरोपियों को जमानत देते हुए कोर्ट ने ईडी को नसीहत देते हुए कहा है कि किसी भी मामले में बदला लेने जैसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जांच की प्रक्रिया पारदर्शी औश्र निष्पक्ष होनी चहिए।