कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी से चार सप्ताह के भीतर इस संबंध में हलफनामा दायर करने को कहा। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर स्वामी यह स्पष्ट रूप से बताते हैं कि सीबीआई ने स्वतंत्र निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो जांच एजेंसी की भूमिका की जांच की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा कि वे उन मामलों का उल्लेख करें, जिनमें सीबीआई की ओर से बैंकिंग घोटालों में शामिल बैंकों के स्वतंत्र निदेशकों के खिलाफ सबूत होने के बावजूद कदम नहीं उठाए गए। स्वामी की जनहित याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश दिया। याचिका में बैंकों में विभिन्न घोटालों में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच का आदेश देने की अपील की गई है।
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चार सप्ताह में हलफनामा दायर करने को कहा
जस्टिस बीआर गवई और न्यायाधीश विक्रम नाथ ने सुब्रमण्यम स्वामी से चार सप्ताह के भीतर इस संबंध में हलफनामा दायर करने को कहा। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर स्वामी यह स्पष्ट रूप से बताते हैं कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने स्वतंत्र निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो जांच एजेंसी की भूमिका की जांच की जा सकती है।
केवल व्यापक रूप से विषय को उठाया गया
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि अगर आरबीआई के अधिकारियों की भूमिका जांच प्रक्रिया में सामने आती है, उन्हें आरोपी के रूप में शामिल किया जाएगा और जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वामी ने केवल व्यापक रूप से विषय को उठाया है। याचिका में किसी विशेष उदाहरण का अभाव है।
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याचिका में लगाए गए यह आरोप
स्वामी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि किंगफिशर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यस बैंक जैसी विभिन्न संस्थाओं से जुड़े घोटालों में आरबीआई अधिकारियों के शामिल होने की जांच नहीं की गई है। उन्होंने दलील दी कि विभिन्न परियोजनाओं को कोष आवंटन में महत्वूपर्ण भूमिका के बाद भी, आरबीआई के नामित अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच वर्ष 2000 से अबतक नहीं हुई है।