सार
रिलायंस की दूरसंचार कंपनी जियो अपना पहला IPO लेकर अगले साल बाजार में धमाल मचाने जा रही है। सूचीबद्ध होने पर जियो का मूल्यांकन 11 से 13.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे यह देश की शीर्ष-4 कंपनियों में शामिल होगी। मामूली 5% हिस्सेदारी बेचकर 58,000 से 67,500 करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है, जो ह्यूंडई के रिकॉर्ड से दोगुना है। जियो के विदेश विस्तार से मूल्यांकन और बढ़ने की संभावना है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार कंपनी जियो आईपीओ बाजार में बड़ा धूम मचाने को तैयार है। हालांकि, अभी एक साल का समय है, पर सूचीबद्ध होने के बाद यह बाजार पूंजी के लिहाज से देश की शीर्ष-4 कंपनियों में शामिल हो सकती है। ब्रोकरेज हाउसों का अनुमान है कि सूचीबद्धता के बाद जियो का मूल्यांकन 11 से 13.5 लाख करोड़ रुपये (134 से 154 अरब डॉलर) हो सकता है। पिछले 20 साल में रिलायंस समूह का यह पहला आईपीओ है। जियो को अगले साल एक दशक भी पूरा हो जाएगा। ब्रोकरेज हाउसों का कहना है कि जियो में मामूली 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने से भी 58,000 से 67,500 करोड़ तक जुटाए जा सकते हैं। यह पिछले साल अक्तूबर में ह्यूंडई मोटर के जुटाए गए रिकॉर्ड 27,870 करोड़ से दोगुना से भी अधिक है। जियो को विदेश में भी ले जाने की योजना है, इसलिए आईपीओ के समय मूल्यांकन और बढ़ सकता है।
गेम चेंजर साबित हो सकता है आईपीओ
ब्रोकरेज हाउसों का कहना है कि जियो का यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। इससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का पूंजीकरण रातों रात 13 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ जाएगा। निवेशकों की संख्या भी बढ़ेगी। इतने बड़े इश्यू से बाजार में तेजी का माहौल बनेगा, क्योंकि जियो में अपने वैश्विक समकक्षों के बराबर मूल्य सृजन की क्षमता है।
| ब्रोकरेज हाउस |
मूल्यांकन (लाख करोड़ ₹ में) |
| गोल्डमैन सैक्स |
13.55 |
| जेफरीज |
12.84 |
| मैक्वायरी |
10.82 |
| एमके ग्लोबल |
10.64 |
| कंपनी |
मूल्यांकन (लाख करोड़ ₹ में) |
| रिलायंस |
18.36 |
| एचडीएफसी बैंक |
14.60 |
| टीसीएस |
11.15 |
| भारती एयरटेल |
10.77 |
चाइना मोबाइल के बाद दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर
जियो ने पिछली तिमाही में हर ग्राहक से 208.80 रुपये कमाए हैं। 50 करोड़ ग्राहक के साथ यह चाइना मोबाइल के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार ऑपरेटर बन गया है। जियो प्लेटफॉर्म्स के राजस्व में इसका 85 फीसदी योगदान है।
रिलायंस का 66.3 फीसदी हिस्सा
जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का 66.3 फीसदी हिस्सा है। मेटा के पास 10 फीसदी और गूगल के पास 7.7 फीसदी हिस्सेदारी है। 16 फीसदी हिस्सा प्राइवेट इक्विटी के पास है। सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि दलाल स्ट्रीट की सबसे महत्वपूर्ण लिस्टिंग के लिए तैयार जियो अपने प्रीमियम मूल्यांकन को सही ठहरा पाएगी।
सेबी ने 13 कंपनियों के आईपीओ को दी मंजूरी
सेबी ने अर्बन कंपनी सहित 13 कंपनियों को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी है, जो कुल 15,000 करोड़ रुपये जुटाएंगी। जिन कंपनियों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की मंजूरी मिली है, उनमें जुनिपर ग्रीन एनर्जी, ऑलकेम लाइफसाइंस, ओमनीटेक, केएसएच इंटरनेशनल, रवि इन्फ्राबिल्ड प्रोजेक्ट्स हैं। मौरी टेक, प्रायोरिटी ज्वेल्स, कोरोना रेमेडीज, ओम फ्रेटफॉरवर्डर्स, जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग और पेस डिजिटेक को भी मंजूरी मिली है।